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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/९६

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भयटीकसाहित । ३ ॐ९ } अथ सुतभावविचारः। अथ सुतभावे किं किं चिंतनीयम् । बुद्धिप्रबंधात्मजमंत्रविद्या विनेयगर्भस्थितिनीतिसंस्थाः सुताभिधाने भवने नराणां होरागमन्त्रैः परिचितनीयाः ॥ १ ॥ } पंचमभावसे क्या क्या विचारकरताना चाहिये को कहतेहैं बुद्धिका प्रबंध, पुत्र, मंत्र, विद्या नम्रता, गर्भस्थिति और नीति ये सब बातें मनुष्योंके जन्मकाळमें पंचमभाव ज्योतिषी फेम विचार करें ॥ १ ॥ लग्ने द्वितीये यदि वा तृतीये विलग्नाथः प्रथमः सुतः स्यात् । तुर्येस्थितोस्मिश्च सुतो द्वितीयः पुत्री सुतो वेति पुरः प्रकल्प्यम्२ जिस मनुष्यके जन्मकालमें छपे छद्म वा द्वितीय वा तृतीयस्थानमें बैठा होय ते। पहिले । धुत्र पैदा होता है जो छलेश चतुर्थ बैठा होय तो पहिड़ी कन्या पोछे पुत्र पैदा होय इतर- हंसे पुत्र कन्या कन्या पुत्रका विचार करना चाहिये ॥ २ ॥ सुताभिधानं भवनं शुभानां योगेन दृझा सहितं विलोक्य ।। संतानयोगं प्रवदेन्मनीषी विषर्ययत्वे हि विपर्ययः स्यात् ॥ ३ ॥ जस मनुष्यके जन्मकळिमें पंचभावमें शुभग्रहोंको राशि होय उसमें शुभमुह बैठे हुए और शुभग्रह देखते होंथ तौ संतानवान् करता है को पंचमभाव पपग्रहोंकरले युक और दृष्ट होय तैौ संतानहीन कहना चाहिये ॥ ३ ॥ संतानभावो निजनाथदृष्टः संतानलब्धि शुभदृष्टियुक्तः । करोति पुंसामशुभैः प्रहृष्टः स्वस्वाम्यदृष्टो विपरीतमेव ॥ १ ॥ जिस मनुष्यके नन्मकळमें पंचमभाव पंचमेश करके इष्ट होय और भग्रहोंरके दृष्ट होय संतानकी प्राप्ति कहना चाहिये और पंचमभाच पापग्रों करके हृष्ट वा युक्त हो र अपने स्वामी करकेभो दृष्ट होय तो संतानहीन कहना चाहिये ॥ ४ ॥ लग्ने वित्ते तृतीये वा लग्नेशो पत्यमश्रिमम् । तुयें जन्म द्वितीयस्य पुरः पुत्र्यादिजन्म च ॥ ५॥ जिस मनुष्यके जन्मकाछमें लुप्त द्वितीय, तृतीय भावमें रमेश बैठा होय तो पहिले सूत्र पछेि कन्या पैदा होय लुग्मेश चतुर्थमें होय तो पहिये कन्पा पीछे पुत्र पैदा हूय १६ ३ । २ । ५ । ७ । ९ । ११ भावस्थित लपेस होय तो पहिले पृष्ठ पीछे क औौ चतुर्थ से ६ ५ ८ १० १ १२ यह भावोंमें पेश बैठ होय तो पठेि कथा ७ ५ ३ ॥.५ /

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