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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/७०

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} };" ( २} अथ सिद्धियोगतफलम् । उदारचेताश्चतुरः शुशीलः शास्रादरः सारविराजमानः । प्रसूतिकाले यदि सिद्धियोगोभाग्याभिवृद्धिः सततं हि तस्य१६॥ जिी मनुष्यके जन्मकाळमें सिद्धिनाम् योग होता है वह मनुष्य उदार बित बतुर श्रेड गळिबाळु शत्रका माननेवाला बळ करके युक्त निरंतर उसके भाग्यकी वृद्धि होती है ॥१६३४ अथ व्यतीपातथोगजातफलम् । उदारबुद्धिः पितृमातृवाक्ये गदार्तमूर्तिश्च कठोरचित्तः ॥ परस्य कार्यं व्यतिपाततुल्यो नरः खलु स्याद्यतिपातजन्मा १७ जिन मनुष्यके जन्मकालमें व्यतीपातनाम योग हो वह मनुष्य उदरबुद्ध पिता प्रताके वचन को माननेवाला रोगयुक्त देहाळाः कनेर चित्त पलये कार्यको बिगड़ने आळा होता है ॥ १७ ॥ अथ वरीयान्योगजातफलम् ।। उरपन्नभोक्ता विनयोपपन्नो द्रव्याल्पतासद्वययतासमेतः ॥ सुकर्मसौजन्यतया वरीयान्भवेद्वीयान्प्रभवे हि यस्य ॥ १८ ॥ जिस मनुष्यले जन्मकाछमें वरीयांननाम योग हैवै वह मनुष्य उत्पन्न किये मोगका भुगनेवाला नम्रतासहित थोड़े धनवाळा श्रेष्ठ कार्यमें खर्च करनेवाला श्रेष्ठ कर्म करनेवाला श्रेष्ठजन होता है ॥ १८ ॥ अथ परिघयोगजातफलम् । असत्यसाक्षी प्रतिभूर्बहूनां व्यक्तात्मकम क्षमया विहीनः ॥ दक्षोपभक्षो विजितारिपक्षस्त्वधर्षितो वै पारिवोद्भवः स्यात्॥१९॥ जिस मनुष्यके जन्मकाल में परिचयोग होता है वह मनुष्य कू गवाही देनेवाला बहु तोंकी जमानत करनेवाला यारहित चतुर थोड़ा भोजन करनेवाळा असृओंका गौतमेवाच्या निर्भय होता है ॥ १९ ॥ अथ शिवयोगजातीफलम् । सन्मंत्रशास्त्राभिरतो नितांतं जितेंद्रियश्चरुशरीरयाष्टिः । योगः शिवो जन्मनि यस्यजंतोः सदाशिवं तस्य शिवप्रसादात् २० निस मनुष्यके जन्म काछमें शिवनाम योग होता है यह मनुष्य श्रेष्ठ अहमें होनर निरन्तर मितेन्द्रिय सुन्दर देझ्या ह्मेशा अॅल्ययओ भास शिंशी कुसे मई २०#

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