{४२ ) अथ योगफलमाह तत्रादौ विष्कंभयोगजतफलम् । शधकांततापुत्रमित्रादिसौख्यं स्वातंत्र्यं स्यात्सर्वकार्यप्रसङ्ग । चंचद्देहोत्पादने मानसं चेद्विष्कंभे वै संभवो यस्य जंतोः ॥३॥ तिरू मनुष्यका जन्म विष्कंभयोगमें होवे वह मनुष्य निईतर स्त्री पुत्र और मित्रादिकोंके सत्यको प्राप्त सब कममें स्वाधीनताको प्राप्त शोभायमान देहवाल होता है ॥ १ ॥ अथ श्रीतियोगजातफलम् । वक चंचवूपसंपत्तियुक्तो दातात्यंतं स्यात्प्रसन्नाननश्च । जानंदः सद्विनोदप्रसङ्गो धमें प्रीतिः प्रीतिजन्मा मनुष्यः ॥२॥ जिस मनुष्यके जन्मकळमें भीतिनाम योग होता है वह मनुष्य बहुत बोरूनेत्राळा सुंदरस्व रूप और चंतित्रछा और मसन्नमुख बड़ा दानी आनंको जाननेवाला श्रेष्ठ विनोदयुक्त न हैं ! २ / अथ आयुष्मानयोगजतफल ३ अर्थापथै साहसैरन्वितश्च नानास्थानोयानपानप्रवृत्तिः । यस्यायुष्मत्संभवः संभवेदं स्यादायुष्मान्मानव मानयुक्तः।।३।। जस मनुछ भने लन्मलमें अदुष्मान् नाम योग होय मनुष्य धन सहस वह करके पूर्ण रखनेवाला ईकै दिन अनेक स्थान और जंगलमें ननेकी इच्छा मान सहित बड़ी । उ५ - १ } ३ } । अथ भाग्ययोगजगतफलम् । ज्ञानी धनी सत्यायशः स्यादाचारशीलो बछन्यिवेकी ॥ मुश्चाध्यमीभग्यवराजमानः सौभाग्यजन्मा हि महाभिमानी४॥ त्रेस स्त्री समकालमें सैमयोग होय यः ननुष्ठश्च ज्ञानवन धनवान सयमें ४ ४2 अझरबल बहुत्र दुर नन करके प्रशंसकी प्रप्र सेiभार युक्क बड़ा अश्मी४५ है ३ ५ हैं । अथ भनोगतफलश् । सलचक्रुद्धः सदुत्सरश्चारुगौरवयुतश्च सन्मतिः ॥ नित्योभनविधानतत्परः शोभनो भवति शोभनोद्भवः ॥ ९ ॥ अझ मैनुयते अत्र ४५ ऑन नाम योग होता है वह मनुष्य बहूत अरबी अनुरता
- स्क; ४ को मृ४ ॥४३ ॐ४ युदै छलिहीशुभ फार्थभं तसर्थ होता है५।
?