( ३२ जातकभरण लिस मनुष्पके जन्भकळमें हस्त नक्षत्र होय वह मनुष्य दानी निरंतर यशवन ब्राह्मण और देवताओंको पूजनमें यल करनेवाला होता है और उसके हाथसे सब तरहकी संपत्ति तो है / १३ ॥ अथ चित्रानक्षत्रजातफलम् । प्रतापसंतापितशत्रुपक्षो नयेतिदक्षश्च विचित्रवासाः ॥ प्रसूतिकाले यदि यस्य चित्रा बुद्धिर्विचित्रा खलु तस्य शास्त्रे॥१७ निस मनुष्यके जन्भाछमें चित्रा नक्षत्र होय तो उस मनुष्यके मतापसे शत्रुजन संतापको प्राप्त होता है वह नतिमें चतुर विचित्र वस्त्र पहिरनेवाळा विचित्र बुद्धिवाद्या शास्त्रोंमें होता है ॥ १४ ॥ । अथ स्वतीनक्षत्रजातफलम् । कंदरूपः प्रभया समेतः कांतिपरप्रीतिरतिप्रसन्नः ॥ स्वाती प्रसूतौ मनुजस्य यस्य महीपतिप्राप्तविभूतियुक्तः ॥१९॥ निस मनुष्य जन्मकाळमें स्वाती नक्षत्र होय वह मनुष्य कामदेवके समान रूपवाळा वैभत्रसहित स्रियोंसे अधिक मीति करनेवाळा अत्यंत मसन्न राजा करके वैभवको माप्त होताहै १५ अथ विशाखानक्षत्रजातफलम् । सदानुरक्तोकोग्निसुरक्रियायां धातुक्रियायामपि चोग्रसौम्यः ॥ यस्य प्रसूतौ च भवेद्विशाखा सखा न कस्यापि भवेन्मनुष्यः१६॥ जिस मनुष्यके जन्मकर्में विशाखा नक्षत्र होय वह मनुष्य अग्निहोत्र और देवताओंको तया तत्षर और धातु क्रियाओंको जाननेवाला उग्र और सौम्यस्वभध होता है और वह तिमीका मित्र नहीं होता है {| १६ ॥ अथ अनुराधानक्षत्रजातफलम् । सन्कांतिकीर्तिश्च मदोत्सवः स्याजेता रिपूणां च कलाप्रवीणः ॥ स्यासंभवे यम्य किलानुराधा संपद्विशालाविविधाच तस्य॥१७॥ लिए मनुष्यके जन्मकळमें अनुराधा नक्षत्र होय वह मनुष्य श्रेष्ठ कांति और कीर्ति
- अन्नमडूिन शङआँका नीतनेला कलाओंमें मवीण होता है और विशालसंपत्तिबाळ
हे ३ + १०० अथ श्रेष्ठानक्षत्रजतफलम् । कतिकीर्तिर्विभुतासमेन विरान्वितोयंतलसप्रतापः । प्रतिष्ठो वदनां चरिष्ये ज्येष्ठोद्भवः स्यात्पुरुषो विशेषात १३८॥