आषाढीसहित । { */ } जिस मनुष्यक जन्मकोछमें द्वितीया तिथि होय वह मनुष्य द्वानी द्यावन गुणवान और विवेकी होता है और निरंतर श्रेष्ठ आचार और विचारोंमें धन्य प्रसत्र मूर्ति बढून यश्चदछ झता है ॥ २ ॥ अथ तृतीयाजातफलम् । कामाधिकश्चाप्यनवद्यविद्यो बलान्वितो राजकुलातवित्तः ॥ प्रवासशीलश्चतुरो विलासी मयंस्तृतीयाप्रभवोभिमानी ॥ ३ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकळमें तृतीया तिथि होय वह मनुष्य अधिक कामी निर्देष विद्यादा बलवान राना करके धन प्राप्त करनेवालों परदेशमें रहनेवाळा चतुर विंटासी और अमि मानी होता है ॥ ३ ॥ अथ चतुर्थजातफलम् । ऋणप्रवृत्तिर्बहुसाहसंः स्याद्रणप्रवीणः कृपणस्वभावः । घृते रतिलोलमना मनुष्यो वादी यदि स्याज्जनने चतुर्थी।। ४ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकालमें चतुर्थीं तिथि होय वह मनुष्य मणमें मवृत्ति करनेवळा बड़ा साहसी संग्राममें प्रवीण जुआ खेळनेवाछा चैचढ़मन विवाद करनेवाछा होता है । ५ / अथ पंचमीलातफलम् । सम्पूर्णगात्रश्च कलत्रपुत्रमित्रान्वितो भूतदयान्वितश्च । नरेंद्मान्यस्तु नरो वदान्यः प्रसूतिकाले किल पंचमी चेत्। जिस मनुष्यके जन्मकालमें पंचमी तिथि होय वह मनुष्य पूर्णशरीर बी और पुत्रं मित्र सहित प्रमात्रपर दयाकरनेवाला राजमान्य मनुष्य होता है ॥ ५ ॥ अथ षष्ठीजातफलम् । सत्यप्रतिज्ञा धनसूनुसंपदोघरुजानुर्मनुजो महौजाः । प्रकृष्टकीर्तिश्चतुरो वरिष्टः षष्ठयां प्रजातो व्रणकीर्णगात्रः ॥ ६ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकाळमें षष्ठी तिथि होय वह मनुष्य सत्यमतिज्ञा करनेवाला धन पुत्रोंकी संपदा सहित वी लंबा और जानुबाळा बझ पराक्रमी बड़ी कीर्तिवळ) चतुर और श्रेष्ठ घाव युकत देइवाछा होता है ॥ ६ ॥ अथ सप्तमीजातफलम् । ज्ञानी गुणज्ञो हि विशालनेत्रः सत्पात्रदेवार्चनचिसवृत्तिः । कन्याप्रजो वै परवित्तहर्ता स्यात्सप्तमीजो मनुजोऽरिहंता ॥ ७ ॥
पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/५०
दिखावट