भाषीकासहित (१) जिवा मनुष्यके जन्मकाछमें रक्षसनाम संवत्सर होताहै वह मनुष्य के सेट में अग्ने वाला कळहमें तत्पर श्रेष्ठ धर्म और श्रेष्ठं विचारोंको त्यागनेवा यद्दित सुइटी होता है ॥ ५९ ॥ अथ नलसंवत्सरजातफलम् । सञ्चद्धिशाली जलसस्यसंपदैश्यानुवृत्तै कुशलः सुशीलः । स्यादल्पवित्तो बहुपालकश्च जातो नशब्दे चपलो मनुष्यः८० निस मनुष्यके जन्मकालमें नलनाम संवत्सर हताहै वह मनुष्य श्रेष्ठ शुदिबाछा खेती करके अन पैदा करनेवाळा वैश्यवृत्ति करनेमें चतुर श्रेष्ठ सुशीळ थोड़ा घनवाद्या बहुत कनका छन करनेवाळा चपळ होता है ॥ ५० ॥ अथ पिंगलसंवत्सरजातफलम् । पिङ्गुक्षणो गर्हितकर्मकर्ता स्यादुद्धतभृचलवैभवाब्धः ॥ त्यागी शटोत्यंतकठोरखाक्योजातो नरः पिङ्गलनामधेये ॥९१॥ जिस मनुष्पके जन्मकाळमें पिंगळ्नाम संवत्सर होय वह मनुष्य पीछे नेत्रयाश्च निषिद फ़र्म करनेवाला उद्दत चंचल वैभव करने सहित त्यागी शत्र अत्यंत क्रूर बाक्य होताहै ॥ ५१ ॥ अथ कालयुक्तसंवत्सरजतफलम् । _ अनल्पजल्पप्रियतामुपेतस्त्वसाधुबुद्धिर्विधिना वियुक्तः ॥ कलिप्रसंगे किल कालरूपो यः कालयुक्तप्रभवः कृशगः९२॥ जिस मनुष्यके जन्मकाळमें काळयुक्त संवत्सर होताहै वह मनुष्य बहुत बोलनेवळ मेति वक्ति खोठी बुद्धिवाळा विधियोंकरके वियुक् कळङ्करनेवाला विकराळरूप होता है की ५२ # अथ सिद्धीसंवत्सरजातफलम् । उदारचेता विलसन्प्रसादो रणाङ्गणनाप्तयशाः सुवेषः । नमंत्री बहुपूजितार्थं सिद्धार्थजातो मनुजः समर्थः ॥ ६३ ॥ निख मनुष्यके जन्मॉछमें सिद्धार्थ संवत्सर होय वह मनुष्य उदारचित्त दावण सेमी मणं यक्षको मात्र सुंदर वेषवाछा राणका वजीर बहुत अलोंझरके पूर्वीय होता है ” ५३ ॥ अथ रौद्रसंवत्सरजतफलम् । भयंकरः पालयिता पशूनां शश्वत्परीवादपरोत्क्र्तिः ॥ आतापकीर्तिः खलचित्तधृतिर्नोतिरौद्रःसख रोअजन्मा ॥५॥
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