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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/३९

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/ तर । { १ ) जिल शुष्यवे अभ्यकालमें वसामः संवत्सर होतहैि वह मनुष्य कामी धेनवान फिर सेऊ के आदर नेपाल नियोंसे संतापको प्राप्त गुप्तबुद्धि चपळस्वभाव होता है । ३५ अथ शुभकृत्संवत्सरजातीफलम् । सौभाग्यविद्याविनयैः समेतः पुण्यैरगण्यैरपि दीर्घजीवी ॥ स्यान्मानवः सूनुधनोरुसंपद्यस्य प्रसरतिः शुभकृत्समासु ॥३६॥ निस मनुष्यके जन्मकालमें शुभः संवत्सर होय वह मनुष्य सौभाग्य और विद्यार न्वत करके सहित बहुत घुष्य करके युक्त बड़ी उभरवाला और वह पुत्र, धन और संप इसे लक्ष्य पूना है । ! ३६ ॥ अथ रेभनसंवत्सरजातफलम् । सवोंत्रतारुगुणो दयालुः सत्कर्मकर्ता विजयी विशेषात् ॥ कांतो विनीतः शुभदृक्प्रवीणो यःशोभने वत्सरके हि जातः३७ नि मनुष्यके जन्मकालमें शोभनेताम संवत्सर होता है । वह मनुध्य ऊँचा शरीर आज मुंद्र सहित द्यावान श्रेष्ठ कर्म करनेवाळा विजयको माप्त सुंदर नम्रतासहित श्रेष्ठ व्रवाळ भयोग होता है ॥ ३७ ॥ अथ क्रोधिसंवत्सरजातफलम् । कॅरेक्षणः कूरतरस्वभावः स्त्रीवद्भः पर्वततुल्यगवः॥ म्याह्वन्तरायः परकार्यकाले कृधी भवेक्रोधिशरप्रसूतः॥३८॥ निथ मनुष्यों अन्यकालमें आँधी संवत्सर होय वह मनुष्य कूर दृष्टिघाला दुष्टस्व भवन्तला का प्यारा पहले संमान अभिभनी पराये कार्यको बिगाड़नेवाळा होता है। ३८ अथ विश्वत्रसुसंवत्सरजातफलम् । सपुत्रदारः सुतरामुदारो नरः सदाचाररतोतिधीरः ॥ मिष्टान्नभुपर्वगुणाभिरामो विश्वावस यस्य भवेत्प्रसूतिः ॥३९॥ क्रिक मनुष्यले कन्प्रकलमें विश्ववसु संत्रसर होता है वह मनुष्य पुत्र और श्री अङ्गिनः नितर अंश हमेशा अचमें तत्पर अतिधैर्यवाछा मिष्टान्न खानेवाळा सम्पूर्ण गुणे ॐ कं देश है ” ३९ ॥ -

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