भाषटीकासहित । (*६१ } अथ नष्टजातकाध्यायप्रारंभः । आधान कालप्यथे जन्मकालो न ज्ञायते यस्य नरस्य नूनम्। प्रतिकालं प्रवदंति तस्य नद्यभिधानादपि जातकाच ।। १ ।। तक्तकं येन शुभाशुभाप्तिर्जातस्य जन्तोर्जननोर्कालात् ॥ तस्मिन्प्रनष्टे सति जन्मकालो येनोच्यते नष्टकजातकं तत् २॥ अब नष्टजातकNध्याय कहते हैं. जिन मनुष्यका गर्भाधानक(ल और जन्मकट निश्चय ॐी नहीं | मालूम होय उन मनुष्योंक प्रसूतिकाळ कहते हैं नष्टनातक करके ॥ १ ॥ नित जातककरके अन्मकळमें मनुष्योंको अच्छे और बुरे फउटी प्राप्ति होती हैं विसको ज़रतकश/ख कहते उसमन्मकाळके नष्ट हेजनेसे फिर जिससे जन्मेकाछका झन होय उसको नष्टजातक कहते हैं ॥ २ ॥ अथ राशिगुणकविधिमाह । मेषादितः प्रश्नविलनलिप्तः कार्याः क्रमात्ता मुनिभिः खचं मैः ॥ १० गजैश्च ८ वेढे ४ दश १० भिश्च बाणैः ? शैलै ७ भुजंगैः ८ खचरैः ९ शरैश्च ६ ३ ॥ शिवैः ११ पतंग १२ निहताः पुनस्ता विलग्नगावेदृणुभैमस्रवाः । तदा तुरंगैः ७ करिभिः ८ खचंदै ३१ ऍण्याः शरैर्न्यखगा यदिस्युः ॥ ४ ॥ पिंडं अब पहिले पंभ्रसभयकी ताकळिकळल्के स्पष्ट करके उसकी कभैक बननः चाहिये और न अभक मेष होय तो उस कळमकपिंडको सातसे शुणना चाहिये युद्धको १० दशमुणा करे मिथुनके ८ कर्कको ५ से संहको १० से कन्यके ५ से और झुलाक ७ से वृश्चिकको ८ से धनको ९ से मकरको ५ से ॥ ३॥ कुंभको ११ से और मीनरूको १२ से गुणपना चाहिये । अथ ग्रहगुणकविधिमाह । जो ळगमें प्रभञ्जनमें सूर्य बैत्र होय तो उसगुणेट्र कळत्मकथंडको फिर से शुणम बाहिये और जो चंद्रमा होय तो भी १ से जुलै जो मभन्नमें मंगट बैश्च देश में इसके ॥ !
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