( ३९८) जातकरण नों शनैश्चरकी दशमें बुधक अंतर सेय तो धन और पुत्र तथा स्नोके सुखसहित श्रेष्ठ राजमानकरके शोभायमान विद्वानोंके संगसे आनंद क कफी पीडा करके दुःखी होता है । ४ ॥ अथ शनिदेशामध्ये जीवांतर्दशाफलम् । कलाकलापे कुशलो विलासी पद्मालयालंकृतचारुशीलः ॥ भूपाळलाभयुतो नरः स्याद्वहस्पतौ मंददशां प्रयाते ॥ ६ ॥ जो शनैश्चरकी दशामें बृहस्पतिका अंतर होय ती कलशके समूहमें कुशला विद्यासुयुक लक्ष्मी करके शोभयमन श्रेष्ठल राजासे धरतीका लाभवाला होता है ॥ ५ ॥ अथ शनिदशामध्ये शुक्रतर्दशाफलम् । योषाविभूषामुतसौख्यलब्धिः श्रीश्रामदेशाधिकृतत्वमुचेः ॥ यशःप्रकाशोऽरिकुलस्य हृता शनेर्दशायामुशन्ः प्रवेशः ॥ ६॥ जो शनैश्चरकी दशमें शुक्रका अंतर होय ती स्त्री और आभूषण औt पुत्रके सैल्पी वृद्धिकरावे और टमी तथा ग्राम अधिकारकी बड़ी प्राप्ति करावे है बडे यशो मम और शत्रुओका नाश होता है । ६ ॥ अथ शनिदेशामध्ये भौमांतर्दशाफलम् । अंतर्दशा चेन्नलिनीशसूनोर्देशतराले किल मङ्गलस्य ॥ भवेत्तदानीं निधनं नराणां यद्यप्यहो दीर्घमवाप्तमायुः ॥ ७ ॥ लग्ननाथरिपुर्लग्नदशाय प्रविशेद्यदि । अकस्मान्मरणं कुर्यात्प्राणिनां सत्यसंमतम् ॥ ८॥ इती श्रीदैवज्ञटुण्दिराजविरचिते जातकाभरणे अंत र्दशाध्यायः ॥ २१ ॥ हो भनेश्वरी दशमें मंगळ अंतर होय तो उसमंगळकी अंतर दशमें मृत्युको मात्र होता है जबड़े बडी उभरवाळा ये न होय ॥ ७ ॥ और ४मकी दमें और कभेशके अयुबकी अंतंर शामें अकस्मात्मरण होता है यह सत्याचार्यका मत है । ८ ।। इति श्रीवंशीर्थगाडदेशावतंसरा मयेतिषिकपण्डितश्यामलाळकृताएँ श्यामसुंदरीभाषी क्रय अंतर्दशाध्यायः समाप्तः ॥ २१ ॥
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