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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/३८

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भटकसंहित । ३४ ॥ अथ हेविलम्बसंवत्सरजातफलदं । . तुरंगहेमाम्बरधान्यरत्नैर्युतो नितांतं सुतदारसौख्यः । समस्तवस्तुग्रहणैकबुद्धियों हेविलंबे पुरुषेऽभिजातः ॥ ३१ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकालमें हेविडंबनाम संवत्सर होताहै वह मनुष्य घोड़े और सोना, वस्त्र, थान्य और रत्नसहित निरंतर पुत्र और खोके सीख्यको भात सब चीगते ब्रह ॥में एक बुद्धिबळ होताहै । ३१ ॥ अथ विलम्बसंवत्सरजातफलम् । धृततिलुब्धोलसतां प्रपन्नः श्लेष्माधिकः सत्वविवर्जितश्च । । प्रारब्धकार्यं नितरां प्रलापी विलंबसंवत्सरसंभवः स्यात् ॥ ३२॥ जिस मनुष्यके जन्मेकाळमें विलंबनाम संवत्सर होता है वह मनुष्य धूर्त बड़ा लोभी आळस्यसहित कफ़ प्रकृतिवाला बळहीन मारब्ध कार्यंमें निरंतर भाप करनेवाटा होताँदै ३२ अथ विकारिसंवत्सरजातफलम् । दुराग्रही सर्वकलाप्रवीणः मुसंग्रही चञ्चलधीश्च धूर्तः । अनल्पजल्पस्ससुहृद्विकल्पो विकारिसंवत्सरजो नरः स्याद३३॥ जिस मनुष्यके जन्मकालमें विकारिसंवत्सर होय वह मनुष्य छूट इट फरनेवाला सब कटाओंमें प्रवीण सब चीजोंक संग्रह करनेवाला चंचळबुद्धि धूर्त बहुत बोलनेवला मित्रोंसे कल्पना करनेवाला होता है ॥ ३३ ॥ अथ शार्वरीसंवत्सरजातफलम् । वणिक्क्रियायां कुशलो विलासी नैवानुकूलश्च सुहृजनानाम् ॥ अनेकविद्याभ्यसनानुरक्तः संवत्सरे शावरिनाम्नि जातः ॥ ३४ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकालमें शर्वरी संवत्सर होता है वह मनुष्य व्यापारके रूभनें आतुर विकास करनेवाळा मित्रोंका विरोधी अनेक प्रकारको विधायक पाश्च करने वाला होता है । ३५ ॥ अथ प्लवसंवत्सरजातफलम् । कामी प्रकामं धनवांश्च शषसेषाद्रोहरहतार्थतसः । सुषुप्तबुद्धिश्चपलस्वभावः श्वधाभिधानादभवो नरस्थाद की

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