सामग्री पर जाएँ

पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/३७७

विकिस्रोतः तः
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति

( ३९६२ ) ऐसा भी मत है कि मंगठको शमें सूर्यके अंतमें ऊिळ फोट पर्यंत इनमें जानेकी इच्छ करे और भ्राता पिता तथा और मनुष्यों से विरोध कराता है ॥ २ ॥ अथ भमदशामध्ये चंद्रांतर्दशाफलम् । नित्योत्सवानंदमहापदानि मुक्ताफलद्रव्यविभूषणानि ॥ मित्रोद्भे श्लेष्माविकारामिंदुभीमस्य पाके विचरन्करोति ॥ ३ ॥ ॥ ने मंगळकी दशा में चंद्रमाका अतंर होवे तो उत्सव और आवंद बड़े पदकोमाप्त मोती नित्य और द्रव्य आभूषणोंको माप्त होवे और मित्रोंफी आने कफफा विकार होता है ॥ ३ ॥ अथ भोमदशामधेय बुधान्तर्दशाफलम् । अरातिभूमयतस्करेभ्यः पीडां वियोगं सुतदारामित्रैः । स्वल्पोत्सवो यच्छछति चंद्रसूनुश्रुमस्य पाके यदि संप्रविष्टः।। जे मंगळकी दशामें बुधका अंत होय ते शत्रुसे राभासे रोगसे और चोरसे पीड़ा होय और पुत्र स्त्री तथा मित्रोंकरके वियोग थोडा उत्सव होता है । ९ ॥ अथ भौमदशामध्ये गुरंतर्दशाफलम् । कलाधिकत्वं नृपतेर्घनातिं कलत्रमित्रामजवाहसौख्यम् । सत्कर्मधर्मानुरतत्वमुच्चैवृईस्पतिभ्रमदशां प्रविष्टः॥५॥ को मंगळकी दशा में बृहस्पतिका अंतर होय तो बळकी अधिकता रानाकरके धन आनि त्री और मित्र तथा पुत्र और वाइनका सौख्य श्रेष्ठकर्म और धर्ममें तस्पर होता है ॥ ५ । अथ भौमदशामध्ये भूगरंतर्दशाफलम् । विदेशयानव्यसनामयायैः कुटुंबवाहद्रविणव्ययश्च । नानप्रवासैश्चलचित्तवृत्तिर्ममान्तरे दानवराजज्ये ॥ ६ ॥ मो मंगळकी द्यामें शुकका अंतर होय तो परदेशी यात्र अनेक व्यसन और रोगों करके पीड़ित कुटुंबियोंसे झगड़ा धनका खर्च अनेक परदेशोंमें चित्तकी वृत्ति चळाय मान होती है । ६ ॥ अथ भ्रमदशामध्ये नेतर्दशाफलम् । कलत्रभुचात्मजनेषु बाधा प्राणप्रयाणांतशरीरपीडा । म्त्रस्थानयानं यदि भानुमुनोरंतर्दशा भमद्रशांतराले ॥ ७ ॥ में मंगछ दशामें शनैश्चरका अन्तर होय तो सी, पुत्र, मित्रजनॉकी बाधा मृत्यूचुप इसे श्रीमझा और अपने स्थानको यात्रा कराता है ॥ ७ ॥