टी जिसके गृश्चिकराशिमें मंगळ गेडाहरु तौ वह मनुष्य खेती का काम करनेalछ । और धन संग्रह करनेवाला और बहुत अनोंका वैरी बहुत बोडनेवाला क्षेत्र है 8 १२ 4 अथ धनराशिस्थितभौमशाफलम् । धनुर्द्धरस्थस्य धरासुतस्य पाकप्रवेशे द्विजदेवभक्तः । नरो नरैन्द्राप्तमनोरथः स्यात्कलिप्रसंगोपहतोत्सवथ ॥ १३ ।। जो धनराशीमें मंगळ बैठाय तौ अपनी दशमें देवता और ब्राह्मणं भक्ति करता और राजकरके मनोरथको प्राप्त और कळक्के संगते उडवरहिन होंवा हैं । १३ । ' अथ मकरराशिस्थितभौमदशाफलम। वक्रस्य ननोपगतस्य पाके राज्योपलब्धिः स्वकुलानुमानात् ।। युजे विषादे विजयो नितांतं सद्रतचामीकरघाजि सँख्यम्।।१६। जो मकरराशिमें मंगळ अपने परमोच्छमें वैशहेय ती आफ्नो दशमें थर्क अति अपने कुछके समान करावे संग्राममें और झगडेमें त्रिनयको प्राप्त होवे श्रेष्ठ रल और सुवर्ण तरह घोड़ोंका सीौख्य देता है ॥ १४ ॥ अथोचांशत्यक्तभौमदशाफलम् । उच्चांशमुक्तस्य महीसुतस्य पाके प्रयत्नात्खलु कार्यसिद्धिः । शस्त्राद्भवेच्छापदतोऽपि भीतिः संतोषजल्पवमहाप्रयासाः१५ ॥ जिसके उचशसे रहित मंगळ मकरमें बैठा होय तौ अपने दशमें यत्नसे बर्यक सिद्धिको माप्त शत्रवे वा व्याघ्रादैिसे भयको प्राप्त हय संतोष होय और विवाद होय इड़ " मयास करता है ॥ १५ ॥ अथ कुंभराशिस्थितभौमदशाफलम् । आचारहीनश्च सुतादिचिता बहुव्ययोर्वेगसमाकुलत्वम् । कुंभोपयातस्य च मंगलस्य स्यात्पाककाले फलमेतदेष ॥१६ न कुम्भराशिमें मेगछ बैठाय तौ अपनी शामें आचारसे रहित पुत्र पौदिकके चिंताको माप्त बहुत खर्च करनेनळा उद्देभको प्राप्त होता है ॥ १६ ॥ अथ मीनराशिस्थितभौमदशाफलम् । मीनोपयातावनिनंदनस्य दशाप्रवेशे हि सुतादिचिता । व्ययामयत्वं च क्रमोपलब्धिर्विचर्चिकादह्नविदेशवासाः ॥ ३७ !
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