भाधटीकासहित । ( ३२$ }
= जो परमनीचमें चंदमा बैठा होय तौ अपनी दमें बहुत व्यचिकी वृद्धि मनुष्यको कुरा और मित्रों से वियोग करवे अहनी हीनता और बहुत चिंताको कराता है । १६ / अथ नीचंच्युतचंद्रदशाफलम् । विमुक्तनीचोडुपतेर्दशायां भवेदवातिः क्रयविक्रयाभ्याम् । धर्मव्यथाधर्मविधानमल्पमल्पं च सख्यं जनमित्रवरैः ॥ १७ ॥ न पंरमनीचसे पतित चंद्रमा वृश्चिकराशिमें होय ने अपनी दशा में क्षय और क्कियते प्राप्ति कराता है धर्मकी व्यथा और धर्मकी असता थोड़ी भिन्नद सौख्य होता है औ१७॥ अथ धनराशिगतचंद्रदशाफलम् । चापोपयातस्य च शीतरश्मेर्देशाप्रवेशे गजवाजिबृद्धिम् ॥ पूर्वार्जिताथपतिर्नितांतमन्यत्र सौभाग्यसुखानि नूनम् ॥१८॥ और जो धनराशिमें चंद्रमा बैठा होय ती इथी घोड़ोंकी वृदि अपनो देशमें करवे और पहिलेका पैदा किया धन नाश होणBऔर दूसरे स्थानमें सैभःक्षय सुख करना है ( १८ ॥ अथ मकरराशिगतचंद्रदशाफलम् । हिमकरश्च सदा मकरस्थितः सुतसुखानि धनागमनानि च । वितनुते तनुतामानिलात्तनोरनुदिनं गमनागमनानि वै ॥ १९ ॥ लो मकरराशिमें चंद्रमा बैठा होय तो अपने दशामें पुत्रों सुघ धनको प्राप्ति करने और वातविकारको चवे और हरएकदिन जाना आना होताहै ॥ १९ ॥ अथ कुंभराशिगतचंद्रदशाफलम् । क्रीडा च पीडाव्यसनानेि नूनं स्युर्मानवानां तनुत शसरे । ऋणोपलब्धिश्चलता नितांतं दशाप्रवेशे कलशास्थितेन्दोः।२०।। न कुंभराशिमें चंद्रमा बैठा होय तो अपनी दशमें कमरमें पीड़ा और खड़ी व्यसनी माप्ति करता है और शरीरमें दुर्बलताको भाप ककी प्रति चंचलमा प्रवे करता है ॥ २२ ॥ अथ वगत्तमे कुंभराशिमतंबद्दशाफलम् । वगतमस्थस्य घटे हिमांशोर्दशा प्रवेशे वलिभिर्विरोधः । कलममित्रद्रविणात्मजावैर्भवद्वियोगो दशनास्यपीडा ॥ २१ ॥ और जो कुंभराशिमतवर्त्तमी चंद्रमा होय तो अपनी दशमें किसी स्थाने मनुष्य से वैर फरावे स्त्री और भिन्न, धन, संतानका वियोग करने और दंत और मूवमें पीडः कराता है ॥ २१ ॥