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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/३२६

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मषीक्रसहिता । {३०१ } में बँ | त्रिभरणयोगः २६ | * रंध्रांबुजयाभवनेषु खेटा विधं च पापद्रय | मध्ययाते । यस्य प्रसूतिः स तु यातेि कामं बX | यमस्य धाम प्रवदंति पूर्वे ॥ २६ ॥ जिस बालकके जन्मकाळमें अष्टम वर्ष सम्म भावमें ईम १ ये\! पापग्रहोंके बीचमें बैठ होय बह बाछक लिई यमर्क नातहै ॥ २६ ॥ संध्याद्वये भांत्यगताश्च पापाश्श्चद्स्य होरा यदि जन्मले । चतुर्थ केंद्रेषु शशकपापाः स याति बालः किल कालगेहम् २७ और पइह राशिके जिस बालकके 6यं मातः फाळकी संध्यामें जन्म होय करके एपञ्ज; अतमें बैठे होंय और चंद्रमा की होरामें ऑन्म हय और चंदमा सहित के द्रमें बैठे ह्य तौ वह बालक शत्र मर जाता है | २७ ॥ भातासहितमरण्यंॉग २८ | न स्मरामस्था यदि पापखेदाः पापेक्षिताः यं साधुखगैर्न दृष्टाः करोति रिटं त्वरयार्भकस्य K में ४. > साकं जनन्याभिमतं बहूनाम् ! २८ ॥ = ' ) | मिस बाछकके जन्मकाळमें सातवें आठवें पापघ्रह बैठे हय और श\/* ] पापग्रह देखते देय और शुभ ग्रह नहीं देखते हय त इष्ट देखक मातासहित अरिष्ट्रको माप्त होताहै ॥ ३८ ॥ अथ मात्रा सह मृत्युयोगः । मात्रा " मूल मात्र हु मरणयौगः २५ ) 7 निजोपरागे त्वशुभान्विते ह । रा च । दुर्लग्नस्थितो भूमिसुतो X > £मस्थः । ततो जनन्या । ॥ सह बालकस्य मृत्युस्तथा |Z/ * ॐ सति शत्रघातः।२९ML = } अपने प्रह्णके समय पापग्रहके सहित चंद्रभ छनमें वैट होप और मैट इट मैe । होय त वह बालक मातासहित मृत्युको प्राप्त होता है और सूर्यं पाप्मद सहित इंभ्रमें दैवः