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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/३२२

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भाषाढकसंहित। ( २६ } ॥ ष्ठाष्टमस्थित चंद्रमाको शुभ ग्रह और पापग्रह ट्रोजें बराबर देखते हय ते अड बाळक चौथे वर्षेमें मृत्युको प्राप्त होतहैि और जो कमती शुभग्रह देखते हय पक्ष प्रह्र ज्यादै देखते होंय वा पापग्रह कमती देखते होंय और शुभग्रह या देते हय ते वैदिक गणितसे अरिष्ट विंचार करना चाहिये ॥ १४ ॥ षष्ठेऽष्टमे मासि मरपयोगः १५ , यथेष्टम मने मरमयोग: ५ श रा / स में घ*। स भई तैर्वा धर्मामस्थैर्ययश- | X = } मृगैर्वा ।। क्रूरग्रहे यो ज नैनं प्रपन्नः षष्ठेष्टमे मास मृतं प्रयाति ॥ १४ ॥ ======== | निष्ठ मनुष्यके जम्मेळमें पड़ने सु २ पृहैं दूसरे बारहें बैठे होंय 'एको योगः '। ॥ } अथघ छठे आठवें बैठे होंय 'दि- - ॐ तीयो योगःअथवा अष्टम नवममें बैठे |N, } होय व ‘तृतीयो योगः ' अथवा कुजे ॥ ८ ॥ स शY /श में | बारहें स्थानमें बैठे होंय तो । वह बाळक /र में ==ी छठे वा आठवें महीनेमें मरतहै ॥ १५ ॥ मठे न मृत्युयोगः १६ षष्ठाष्टमस्थाशुभखेचरेंद्रा विलोमगैः पापखगैः == श प्रहृष्टाः । शुभैरदृश्वा यदि ते भवंति मासेन । नूनं निधनं तदानीम् ॥ १६ ॥t मिस मनुष्यले अन्मकळमें छठे आठवें शुभ प्र ग्रह बैठे होंगे। . और बंधी दोषर पापी पडू देखते होंय भीर शुभ ग्रह नहीं देखते. १ --> दोष तो यह मनुष्य एक भासमें मृत्युको माप्त हताहे ॥ ११ /