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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/३१९

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( ३९५ ) सभर सबसने चाहे अमृत क्यों नहीं पेिया तौ या आश्चर्य है कि जिसने अमत नहीं पियौहै एक वर्षेमें मृत्युको माप्तड़ताहै ॥ ५ ॥ अथ षष्ठवर्षे रेिष्टयोगः । पटव ट्टियोगः ६ घडवंधै रिष्टयोगः ६ दछसूर्येन्दुगेहे दनुजेंद्रमंत्री // व्ययाष्टमारिस्थित सौम्य की खेटैः सर्वैःप्रदृष्टः खलु पाड्रिब्दैर्जातस्य जंतोर्वि | ५ ४\५ तनोति रिष्टम् ॥ ६ ॥ ४५ ॥ नि मनुष्यके जन्भकळमें हि वा कर्क राशिगत शुक छळे आठवें बारहें बैठा होय और शुभ ग्रह उसको सब देखते होंय तो उस बाळकको छठे वर्ष रिष्ट होत है । ६ ॥ श्री १२ अथ चतुर्भिर्वरिष्टयोगः । चतुर्वणैरिट्यगः ७ चतुर्वणैरिष्टयोगः ७ ३ि८ छ। सोमस्य सूनुर्यदि कर्क - 3. | ? टस्थः षष्ठेऽष्टमे वा भवने ॥ १, २८ विलमात्॥ चंद्रेण दृष्टो- | | ३५ ७ | ऽब्दचतुष्टयेन जातस्य ॥ ४ ३ ६ जंतोः प्रकरोति रिखम् ।। £Z== ड्ड ४ निस भनुष्यके जन्मकाळ कर्कराशिगत बुध छठे वा आठवें स्थानमें तुमसे बैठा होय और चंद्रम करके इहोय तो उस बाळकको चंथे वर्षमें आरिष्ट करताहै ॥ ७ ॥ केतूदयो भे प्रभवेच्च यस्मिस्तस्मिन्प्रसूतिर्यदि यस्य जंतोः॥ स्यात्तस्य मासद्वितयेन नाशो विनिश्चयेनेति वदंति पूर्वे ॥ ८ ॥ त्रिस्र मनुष्य जन्म भूत्रकेतु तशके उदयने नक्षत्रमें ओय वह बाळक दाँ मासमें निर्माण करने मरताॐ ॥ ८ ॥