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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/३१६

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( १९१ ) - मनु भाषाढीकासति । है और बुध बछ। य तो दंडी संन्यासी होता है कपटक करनेच ही मंत्रों का धन करे मयूरतंत्रके भतमें स्थित मांसंका खानेवाळा दंडी कहता है बैर शिखाके ऽपि योगकारक ग्रहों में ब्रुइंस्पति बलवान् होय तो यत तपस्वी एक दंड अथवा तीन दंदै थारण करनेबाळ गेरुआ कपडे पहिरनेवाछा वानप्रस्थ धर्मस्थिव अह्वर्थको मात्र तीर्षमें झन - नेवा' होता है और संन्यासयोग करनेवाले ग्रहोंमें शुक अधिक बछान होय तो वह च। धारण करनेवाछा पशुपतिपक्षकी दीक्षामें स्थित हमेशा बत करनेवाछा होता है और संन्यास योगकारक ग्रहों में शनैश्वर अधिक बळी होय तो वह नंगा संन्यासी पारखंडनतमें स्थित - त्रत धारण करनेवाग्रा अचकमतमें स्थित कठिन तपस्या करनेवाला होताहै और जो इम्य सयोगकारकग्रह किसी ग्रहसे युद्धमें हार हय अन्य वा मन्मपति परानय होय ते वह संन् स्यतित होनाता है ॥ ६ ॥ एकस्थानस्थितैः खेटैः संधैश्च बलसंयुतैः ॥ निरम्बरा निराहारा योगमार्गपरायणाः ॥ ७ ॥ निस मनुष्यके जन्मकाळमें एकस्थानमें सम्पूर्ण घळयुक्क ग्रह बैठे होंय व संन्यासयोगकारक हय तो वह मनुष्य नंग होकर भोजन त्यागकर योगमार्गमें तत्पर होता है ॥ ७ ॥ एकस्थाने खेचराणां चतुर्णां योगश्चेत्स्यान्मानवानां प्रसूत । ते स्युरॅमीपालवंशेपि जाताः कांतारांतर्बासिनः सर्वेणैव ॥ ८ ॥ मिस मनुष्यके जन्मुकाछमें एकरा छिमें चार ग्रहोंका योग बटवान् हूय वह मनुष्य रामके वंशमेंभी पैदा हुआ हमेशा बनमें वास करनेवाला होता है । ८ / पंचखेचरपतिर्यदि मृतौ भूपतेरपि सुतः स च नित्यम् ॥ कंदमूलफलभक्षणचित्तोत्यंतशांतिविजितेन्द्रियशत्रुः ॥ ९ ॥ निस मनुष्यके जन्मकालमें पांच ग्रह एकभावमें संन्यासयोगकारक बैठे होंय बह मनुष्य रामकाभी पुत्र होश कंद, मूल, फल भोजन फरनेमें चित्त फरने वाला अन्यंतशत इंदिरों का नीतनेवाला होता है ॥ १ ॥ एकत्र षण्णां गगनेचराणां प्रसूतिकाले मिलनं यदि स्यात् । ते केवलं शैलशिलातलेषु तिष्ठंति भूपालकुलेषु जाताः ॥१० निस मनुष्यके जम्माळमें एकस्थानमें संन्यासयोगझरफ छः प्रहका योग होय ? मनुष्य आहे रानाको वंशमें पैदा होय तभी ती शिळाने ती वास करनेछ तेस है १०