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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२९७

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( २७२ ) जातकं भरण नेिस मनुष्यके जन्मक छमें श्रृंगाटक नाम योग हतहै राजा सेइसी वह मनुष्य उत्कृष्ट शूद्रकी के फरनेवाळ सौख्य सहित बड़ा दबान् पहिली नसे वै करनेवाला ' न हैं ४ २३ ॥ अथ इतनामथोगफलम् । प्रेष्यो युक्तः साधुभिर्मित्रवरैः कृष्याजीवी दुःखितोत्यंतभुक्स्यात् । उपात्तं यो लाङ्गलाख्ये प्रयाति याति के निर्धनत्वात्प्रकमम् २३ नेिन मनुष्यके जन्मकाळमें हळ नाम योग होतौहै वह मनुष्य त साधु और मित्रोंकरी हिंत खेती करके आनोविका करनेवाळा अत्यंत दुःख भोगी होता है और क्लेरों को प्राप्त धनहीन होता ॥ २४ ॥ अथ वज्चयगजातफलम् । आधे भागे जीवितस्यांतिमे च सौख्योपेतो भाग्यवान्मानवःस्यात्॥ मध्ये भागे भाग्यहीनः प्रकामं कामक्रोधैरन्वितो वव्रयोगे॥ २६॥ जिस मनुष्यके जन्मकालमें बत्र नाम योग होताहै वह मनुष्य पहिची अवस्थामें जीवि कको आम अंतमें संख्यको प्राप्त भाग्यवान् होता है और जवानीमें भाग्यहीन काम क्रोध करते सद्दिन तातें ॥ २५ ॥ अथ यवथोगफलम् । मध्ये भागे धर्मकामार्थसंपत्सौख्यंयुक्तः स्याद्विनीतो वदान्यः । नित्योत्साहःसङ्गते तु प्रशांतःशांतक्रोधो यः प्रसूतो यवाख्ये२६॥ निस मनुष्यके जन्मकळमें यवनाम योग होताॐ वह मनुष्य जवानी उमरमें धर्म

  1. म अर्थसंपत्ति और सौम्यसहित नम्रतसहित इमेशा उत्साही श्रेष्ठवृत्तिवठा शतचित्त

धङ्कित होतहैि ॥ २६ ॥ अथ कमलयोगफलम् । नित्यं दंपत्कर्षशाली बलीयांश्चञ्चत्कांतिमतिकीर्तिर्मनुष्यः॥ योगं सूतिसरोजे स राजा राज्ञो वंशे वा भवेदर्घजीवी॥२७ जिस मनुष्यके नमकछमें कैमछ नभ योग होता है वह मनुष्य इमेशा बड़े हर्षवाळ! जनन सुंदर कांतिमाळा यशवान् भाते वंचूमें उत्पन्न बड़ी उमरखाळा होताहै ॥ २७ ॥ अथ वापीयंगफलम् । दीर्घायुः स्यादात्मवंशावतंसः सौख्योपेतोत्यंतर्धरो मनीषी । चंचद्रायः सन्मनाः पुष्यवाणी वापीयोगे यप्रसूतः प्रतापी२८॥