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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२९३

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। ( २८ ) जातकाभरण अयोः == भब यूए. शर शक्.ि दंड. चार यौग कहते हैं कुलसे चतुर्थभावतक / सब ग्रह पहुँ तौ यूप नाम होतौहै और च .. अँड चतुर्थसे सप्तमतक सर्व ग्रह पड़े तौ । शर नाम योग और सातवेंसे दशम- |- Y== नई सय ग्रह पहुँ तौ शतियोग और शम्भावसे ळपर्यंत सब ग्रह हाँ तौ शक्तियोग होता है यह ज्योतिषी लोगोंने कहा है ।१०॥ अथ नौकट छत्र-धनु-अर्द्धचन्द्रयोगानाह । भकायोगः | न लग्नाचतुर्थास्मरतः ख- | यो छु । ॥ ॐ | मध्यात्सप्तसँगैर्नरथ कू- ॥ ४ स ह में || टसंज्ञः ॥ छत्रं धनुश्चान्य गृहप्रवृत्तैर्नापूर्वकैयौंग इ- ॥ ४ ) हार्धचंद्रः॥ ११ ॥ कूटयोगः == = अघ नकाकूट छत्र धनुष द्वार । , योग कहते हैं जिसके छwसे लेकर सातवें भवतझ भब ग्रह पड़े तो | चं नौका योग होता है और चतुर्थळे । ॐ चं | लेकर दुशमभावतक सत्र मुझ पड़े तौ / * कूट्योग होता है और सप्तमसे लेकर एक सब् ग्रहू पर्दे तौ त्रयोग होता है और दशमसे लेकर चतुर्थतक सब ग्रह पहुँ तो धेनुप्रयोग होता है १ १ ॥ अथ चक्रसमुद्रार्द्धशशियोगानाह । स्वयम् । समुद्योग ई | स्युः स्थानषद्धे गगनेच - वं/X } +, रौद्रः । चक्राभिधानश्च समुद्रनामा योगाइती == इकृतिजाध विंशत् १२ ११/ =

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