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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२९०

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भाषrीकासहित (३६०) तां शकटुयोग होता है और जिसके इर्धं शममें सब जगह बैठे मॅय न विहृन्मये हृतः । है श्रृंगाटकयोम कहते हैं जो ळञ्ज पंचम नवमम सुव अइ पेंदें तो भृगz¥ येम हैं। अष है अब हठयोग कहते हैं द्वितीय, छठ, दशममें सन ग्रह पडे झॉय ( द्वितीय योगः ) और तृतीय सम्म, एकादशमें सच ग्रह पडे हों ( तृतीयोयोगः ) गौर चतुर्थ, अष्टम, बारहें सब ग्रह पड़े तो (चतुर्थ योगः )ये चर योग होते हैं ॥ ३ ॥ शकटयोगः विहंगयोगः गढवलयाः धू , इ ६ ई. [ @ { शमं हैं | म हा | अथ हलनामयोगः । धनारिखस्थैत्रिमदयगैर्वा चतुर्थेऽव्ययसंस्थितंच ॥ नभस्तलस्थैर्हलनामयोगः किलोदितोयं निखिलागमलैः ॥ ४॥ हठयोगः इळयर्थः म ॥ | १ | अष इंछ नाम योग कहते हैं सो तीन ऑकारक है २ ६ १० संघ अह प(झे मेगः) ३७११सब ग्रह पहुँ (द्वितीयो भागः५८१२ सब अ बड़े तो (तृतीय ईरू भाम बोगः / यह योग सम्पूर्ण ज्योतिषघेताओने कहा है । ४ ।