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( २६' ) तमर अयागः मायायोगः भयोग EW | | ( ३४ ॥ यतः श्यालयो बाळयगः Z अथ गदाशकटविहंगशृगाटकयगानाह । गदयोः ज़ आसन्न केंद्रद्धयगैर्गदाख्यो क्रुध लगास्तसंस्थैः शकटः । में है। समेतैः। खबंधुयातैर्विहगः खै है प्रदिषुःश्रृंगाटकं ललन - झंका /वात्मजस्थैः ॥ ३ ॥ !==== गथगः जिस मनुध्यके जन्मकळमें पास | पक्षके केंद्रोंमें सब ग्रह बैठे हय तौ । गदानाम योग होता है वह गदायोग -> टू शक . < * २ - चार प्रकारका होता है ललचतुर्थमें स ईं च सु) | सय ग्रह हॉप (एको योगः ) चतुर्य । सप्तममें सब ग्रह बैठे हॉप ( द्विती न यो योगः ) समशममें सय ग्रह
- ते हैं ( जुनीय योगः ) इक्षम कमेंमें सम अह ठे होय तो ( चतुर्यो योगः ) से
मालवण गदायैग कहा है अन्य इकट्योम कहते हैं वे उस खममें सब प्र बैठे में