सामग्री पर जाएँ

पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२७५

विकिस्रोतः तः
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति

( ३२७ } आंतरथा-- मिस मनुष्यके जन्मझाड़में सिंहराशीमें सूर्य पेशा होप और कर्मराशिमें चंद्रमा बैठा होय और वृहस्पति करके दोनं दृष्ट हय त वह मनुष्य राजा होता है ॥ ६१ ॥ बुधः कर्कटमारूढो वाक्पातश्च धनुर्धरे ॥ ७ ६ ॥ रविभूसुतदृष्टं तौ पार्थिवं कुरुते सदा॥६२॥ निस मनुष्यके जन्मकळमें बुध कर्करालिमें बैठा हय औts२.} गृहपति धनराशिमें बैठे और दोनों मूर्च,मंगल करके इष्ट होय || ',

  • चह्न राना होता है ॥ । ६२ ॥

८.४ १ र शफरीयुगले चंद्रः कर्कटे च वृहस्पतिः । ३. शुक्रः कुंभे भवेद्राजा गजवाजिसमृद्धिभाइ६३ चं निस मनुष्यके जन्मकाछमें मीन वा भेषराशिमें चंद्रमा बैठा १९; १२ \ होय और कर्कराशिमें बृहति होय और शूक कुंभाशीमें ११ बैठा होय तौ वह राग हाथी घोडों सहित समृद्धिका भोगी होता है ॥ ६३ ॥ सञ्जयगमः सितदृष्टः शनिः कुंभे पझिनीनायकोदये ॥ च । स ३ २१ चंद्र जलचरे राशं यदि राजा तदा भवेत्६४ || ५ > नड मनृध्यके जन्मकाळमें झुक करके दृष्ट शनैश्वर कुंभरा - < ६ १२ में वैसा होय और सूर्य कुंभमें बैठा हो और चंद्रमा कर्कर में बैठा होय तैौ वह मनुष्य राजा होता है ॥ ६४ ॥ A LE===== १० यू. ४ चेत्खेचरो नीचगृहं प्रयातस्तदीश्वरश्वषि । तदुद्धनाथः । । केंद्रस्थितौ तौ भवतः प्रसूतौ ३१K? प्रकीर्तिती पृथतिसंभवाय ॥ ६ ॥ जिस मनुयके जन्मकामें जो केंदबर्ती ग्रह नीच राशिमें ५ Eि' स हय उस अधिक मी न अह है उसकी उच्चराशिक Z¥f= अमी ईमें कैसा हो ही शतक कुश्में उत्पन्न मनुष्य राग होता है ॥ ६५ ॥ .