२४९ हैं षटीकासहित मैत्रे च दाऽप्यथवास्मतु वर्गोत्तमे भूमिसुतः करोति = महीपतिं पार्थिववंशजातं चन्यं प्रधानं धनिनं समृद्धम् + ९७ जिस मनुष्यके जन्मकालमें अनुराधा, अश्विनी नक्षत्रमें अथवा अपनी उचरपशीि मअगले अथवा वगतम नवांशमें मंगळ बैठा होय ऐसे योगमें उत्पन्न के वंशमें मै २ हु शक ५७ ! होताहै अन्य वंशमें उत्पन्न भनान् समृद्धिसहित राजाका वीर इतके ॥ चेद्भार्गवो जन्मानि यस्य पुण्ये मेधूरणे पूर्णतनुः शशकः । अन्ये ग्रहा लाभगता भवेयुः पृथ्वीपतिः पार्थिववंशजातः८८ जिस मनुष्यके जन्मकालमें शुक नवम बैठा होय और पूर्णचंद्रमा दशम वैठे और बीके मह ग्यारहें बैठे होंय तो राशते वंशेमें उत्पन्न मनुष्य राम होता है ५८ ॥ राजयोर्गः ॐ उपचयभवनस्थाः सर्वखे - । राषया: X > नष्टॅमिसूनोर्भवंति।त्रि तनयनवमस्थाः कुर्वते ते न । ऋ = | १ | रौद्रं गजतुरगरथानां सं पढ़ राजमान्यम् ॥ ९९ ।। जिस मनुष्यके जन्मकालमें चंद्रमासे तीसरे छठे दशवें ग्यारहें सब ग्रह ठे हये (एक योगः ) अथवा मंगलसे तीसरे, पांचवें, नवम. सूर्य, बृहस्पति, चंद्रमा कैठे होंय नौ वह मनुष्य हांथी घोड़े और रथ औरभी अनेक संपदासहित राजभान्य होता है । ५९ / सुखे सितज्ञौ सहजेम्बुजेश स्लिटंति खेटाः , रसाः प सुतधाम्नि चान्ये ॥ निजारिराशं नहि क - सु{ । श्चिदत्र धात्रीपतिश्चैककृतातपत्रः ॥ ६९ ॥ निस मनुष्पके जन्मकळमें चतुर्थ भाषमें शूक, बुध, बैठे - होय और तीसरे सूर्य बाफीके अह पंचम बैठे हय अपने शत्रुकी 5======= राशिमें कोई न होय तौ एसे योगमें उत्पन्न मनुष्य धरतीका एकछत्र धारी राख होतीहैं ६० सिंहे कमलिनीभर्ता कुलीरस्थो निशारः । दृष्णैौ द्वावपि जीवेन पार्थिवं कुरुतः सदा ।। ६३ ।। अन्न ।
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