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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२६५

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जrतकोशैर { २४७ } ईलिस मनुष्यके जन्मकालमें शु* या बुध उच्चराशिगत लग्नमें बैठा होय मरमें मंगळ धन मेिं घुइन्नति चेदमा श्रेष्ठ राजके जन्मकाळमें ऐसा योगं होये वह राजा इंदकी समान धर भने ऊरु होता है अथवा समग्र धरतीका स्वामी होता है ॥ २२ ॥ ( जयग है ककेऽर्कचंद्र सुरराजमंत्री शत्रुस्थितश्चापि कि , १ । बुधः स्वर्गे । कश्चिद्वलीलग्नगतः स राजा ||२१०मी.४८ ४ । राजाधिराजाभिधयालमेव ॥ २३ ॥ ६L. जिस मनुष्यके जन्मकाळमें कर्कराशिमें सूर्य चंद्रभा बैठे || २ & ४ & हैं और बृहस्पति छठे औरं बुध अपनी उच्चराशिमत होप ३५ ॥ और कोई ग्रह छनमें बळो वैकर बैठा होय वह्न मनुष्य राजाधिराज राजकरके प्रसिद्ध होता है | २३ | राजगः । ९११ गुलर्निजोच्चे यदि केन्द्रशाली राज्यालये दा- । । नवराजपूज्यः । प्रसूतिकाले किल तस्य ११० ॥ X ८.७ मुद्र चतुःसमुद्रावधि गामिनी स्यात्।२am | ५ निस मनुष्यको जन्मकळमें बृहस्पति उच्चक होकर केन्द्रमें ॥ १५ हेय दशमभाषेमें शुक बैठ होय ऐसा योग होने उस \Z_३ गलक प्रया अF मेह वर समुद्रतल चछता है ॥ २४ ॥ यः ? ५२ ७ ५ जो देवचायंदिनेश्वरौ क्रियगतं मेषुरणे क्षणिजः ५ ५ | पुण्ये भार्गवसौम्यशीतकिरणा यस्य प्रसू ५,३ नं. # तौ स्थिताः ॥ नूनं दिग्विजयप्रयाणसमये ी सैन्यैरिला व्याकुला चिंतामुद्वहतीति का १९ घुस १_ गति रहे सवैसदाख्यास्थितैः ॥ २९ ॥ अल मनुष्यके जन्पळमें बृहस्पति और सूर्य मेषराशिगत उनमें बैठे हय और दृशम्। भामें मंछ चैत्र द्रोण और नत्रम स्थनौं झुक बुध चंद्रमा बैडे. ह्य य जिघके जन्म करिम । भोग इंच उम रःी द्विभिनय यात्रा के समय भीमकरके धरती व्याकुळ हे ली है और पूरी सम चिंतक करके कहते हैं कि अप क्या गति होने वाी है।२५।।