भाषाटीकासहित । ( * } 5योगः ११ राजयोगः १९ शमः २० ११५॥८९ ११ च. ९, ७ १२ श. ६ मं. } E3 राजयोगः २३ १ : ११ इसी प्रकार चंद्रमा छनमें न बैठ होय और न देसतः || २ | हेय और चार वा पांच वा छः ग्रह प्रको देखते हॉय तो और योग होते हैं a |-श. ३ से. २३३ ६ छु १२ उदग्वसिष्ठो भृगुजश्च पश्चात्प्राग्वाक्पतिर्दक्षिणतस्त्वगस्त्यः । । प्रसूतिकाले स भवेदिलाया नाथो हि पाथोनिधिमेखलायाः७ निस मनुष्यके जन्मकाछमें उत्तरमें बशिष्ट और शुक पश्चिममें पूर्व में वृहति द्वषये अगम्य हय ऐसे समयमें पैदा हुधा मनुष्य समुद है तगड़ी निस्की ऐसी धरतीका स्वामी होता है ॥ ७ ॥ । राजयः ११० | चत स्वोच्चे मूर्तिगतेऽमृतांशुतनये नवे सवने ८ ६ ३-५१ । शनौ चापे वागधिपेंदुभार्गवयुते स्याज्जन्मभू- | ३ मीपतेः ॥ स्वस्थाने ननु यस्य भूमितुरगो },'"/ मत्तेभमाणमिळत्सेनांदोलितभूमिगोलकल- ॐ नं दिग्दंतिनः कुर्वते ॥ ८ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकालमें उच्चराशिगत कलमें खूब बैठा हो और मकरराशिमें मंगळ नहित शनैषर बैठा होय और धनरासिमें घुस्यति चेद्दीमा झुक करने वइित बैठा भूवे से
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