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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२४३

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( ३३८ ) शत्र स भनुपले जन्मकाळमें सूर्य शुक एक राशिमें बैठे हूय वह मनुष्य गाना और बनाना और दुबिमें बुदबुद्धिबळा नेत्रके बळसे रहित स्वीकरके साईित मित्रोंके समजकरके घूर्ण अय सूर्यशनियोगफलम् । तुक्रियापण्यमातिर्गुणज्ञो धर्मप्रियः पुत्रकलत्रसख्यः ॥ सदा समृद्धोऽतितरां नरः स्यात्प्रयोतने भानुसुतेन युक्ते ॥ ७ ॥ किस भनुष्यके इन्मजाछमें सूर्य शुनि एक राशिमें बैठे हों वह मनुष्य धातुक्रिया आर व्यवह्रमें शुद्धे रखनेवळ गुणका जाननेवाला धर्म निस्को प्यारा पुत्र और खीसे सं व्यपनेषुळा हमेशए अत्यंत समृदियैसहित होताहै ॥ ७ ॥ अथ चंद्रबुधग्रोगफलम् । सदाग्विलासो धनवान्सुरूपः कृपाईंचेताः पुरुषो विनीतः । कांनापीतिीव वक्ता चंद्रे सचांद्रौ बहुधर्मकृत्स्यात् ॥ ८॥ भिड अनुत्यके तन्मेकाछमें चंद्रमा बुध एक राशिमें बैठे हय बह मनुष्य अष्ठषाणोवाच द न् म्ररूपबाट दुधकके शुक्तचित नम्रतासहित स्त्रीले अधिक मीति करनेवाळा बड़ा भारी नैतः ६ ; ८ १।। अथ चंद्रगुरुयोगफलम् । सदा विनीतो दृढगूढमंत्रः स्वधर्मकर्माऽभिरतो नरः स्यात् ।। परोपकादतैकचित्तो शीतद्युतौ वाक्पतिना समेते ॥ ९ ॥ क्रिस् मनुष्यकं तन्मुकछमें चंद्रमा धृइति एकरराशिमें बैठे होंय वह मनुष्य हमेशा मनुस्मद्दिने मनसून ले सलाह करनेत्राळा अपने धर्म और कर्ममें तत्पर पराये उपकर इनमें कचेन र है ४ ९ / अथ चंद्रशृणुयोगफलम् । वस्त्रादिकानां क्रयविक्रयेषु दक्ष नरः स्याद्वचसनी विधिज्ञः । सुगंधपुष्पत्तमवन्नचित्तो द्विजाधिराजे भृगुजेन युक्ते ॥ १० ॥ निष्ठ मनुष्ग़ळे अ-प्र/छमें चंद्रमा शुक्र एकराशिमें बैठे हय यह मनुष्य वखादिकोंके सने , बेलनों चतुर और व्यसनसहित विधिको माननेवाली सुगंध और उत्तम

  • श्म अभमें जिन पूर्वमेनाह्नार होतर्हि । १५ ॥