भाषीकासहित । ( २१ } ' अथ सूर्यभौमयोगफलम् । भवेन्महौजा बलवान्विमूढो गाढोद्धतोऽसत्यवचा मनुष्यः । मुसाहसः शूरतरोतिहोत्रो दिवामणौ शोणिसुताभ्युपेने ॥ २ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकळमें सूर्य मंगळ एकघरमें बैठे होंय यह मनुष्य अंड़े यब छ। चढवान् मूळ अतिशय करके उन छूठ बोलनेवाछा साहसी और शूदी इस झरने होता है ॥ । २ ॥ अथ सूर्यबुधयोगफलम् । प्रियवचाः सचिवो बहुसेवयार्जितधनश्च कलाकुशलो भवेत् ।। श्रुतंपदुर्हि नरो नलिनीपतौ कुमुदिनीपतिसूनुसमन्विते ॥ ३ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकाळमें सूर्यं बुध एक घरमें बैठे होंय यह मनुष्य यरो दोस् वाळा मंत्री बहुत सेवा करके धन इकट्ठा करनेवाला कळऑमें कुछ स्लम स्ट्र होता है । ॥ ३ ।। अथ चंद्रभौमयोगफलम् ।। आचारहीनः कुटिलप्रतापी पण्यानुजीवी कलहप्रियश्च । स्यान्मातृशत्रुर्मनुजोरुजातः शीतद्युतौ श्रुमुतसंयुते वै ॥ ९ ॥ निस मनुष्यके जन्मकाछमें चंद्रमा मंगळ एक घर में बैठे होंय बह मनुष्य आवईत चुगूळ प्रतापी व्यापारसे आजीविका करनेवाला झटह निको प्यारे तु वैरी रोग रहे दुखी होता है ॥ ४ अथ सूर्यगुरुयोगफलम् । पुरोहितत्वे निपुणो नृपाणां मंत्री च मित्रातधनः समृद्धः ॥ परोपकारी चतुरो दिनेशे वाचामधीशेन युते नरः स्यात् ॥ ६ ॥ निम्न मनुष्यले जन्मकाछमें सूर्य बृहस्पति एक राशिमें बैठे हये वह मनुष्य पुरेति- तामें निपुण रानाका मंत्री मित्रता धनकी समृद्धिको प्राप्त राथा उपकार करनेवाला पर होता है ॥ ५ ॥ अथ मूर्यशुक्रयोगफलम् । संगीतवाद्यायुधचारुबुद्धिर्भवेन्नरो नेत्रबलेन हीनः ॥ कांतानियुक्ताप्तसुहृत्समाजः सिताऽन्विते जन्मनि पझिनरो
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