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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२१९

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{ १९४ ) निख मनुष्य जन्मकालमें मेषराशिका वृक्षति बैठ होय वह मनुष्य . बड़ा उदार चित्त इक्षुओंको उन्नतिसहित माररूधशन् देवताओंसे पूजित बडी बुद्धिवाला होता है ॥ ४९॥ अथ वृषराशिगतगुरुफलम् । द्विजसुरार्चनभक्तिनविधूतयो द्रविणवाहनगौरवलुब्धयः ॥ सुरगुरौ वृषभे बहुवैरिणश्चरणमा रणगाढपराक्रमैः ॥ ६० ॥ मिस्र मनुष्यके जन्भकालमें वृषराशिका बृहस्पति बैठा हूय वह मनुष्य ब्रह्मण देवताओंके पूनन और भक्तिसहित धनवाहन,गौरखताक छोभी बहुते वैरियोंवाळा युद्दको प्राप्त संग्राममें वर परभवाळा होता है ॥ ५९ ॥ अथ मिथुनराशिगतगुरुफलम् । कवितया सहितः प्रियवाच्छुचिर्विमलशीलरुचिर्निपुणः पुमान् । मिथ्नगे सति देवपुरोहिते सहितता हिततासहितै र्भवेत् ॥ ९१ ॥ जिच्च मनुष्यकं जन्मकाळम मिथुनराशिका इस्पति आ होय वह मनुष्य काध्य करने सहित प्यारी वाणी बोळनेवाळा सुंदर झीळ रुचि चतुर हितकरके सहित होता है ॥ ५१ ॥ अथ कर्कराशिगतगुरुफलम् । वहुधनागमनो मदनेन्नतिर्विविधशास्त्रकलाकुशलो नरः । प्रियवचाश्च कुलीरगते गुरौ चतुरगैस्तुरगैः करिभिर्युतः १५२॥ निस मनुष्यके जन्मकाळमें कर्कशाशीमें बृहस्पति बैठा होय बह मनुष्य बहुत धन छ। काम इक्री टनतिसहित अनेक शास्त्रोंकी कलाँमें कुशद्ध निष्टभाषी चतुरतकरके घोड़े और हथि यकरके सहित होता है । ५२ ॥ अथ सिंहराशिमतगुरुफलम् । अचलदुर्गवनप्रभुतोर्जितो दृढतनुर्ननु दानपरो भवेत् ॥ अरिविभूतिहरो हि नरो युतः सुवचसा वचसामधिपे हरौ॥९३॥ तिष्ठ मनुष्यके समकालमें सिंहाशेमें वृहस्पति बैठा होय वह मनुष्य पर्वत, किया, कट बनेका स्वामी मजबूत शरीर दानकरनेवाला शत्रुओंके वैभवको इरण करनेवळ श्रेष्ठवाणी नेत्रहा क्षेत्र है ॥ ५३ ॥ अथ कन्याराशिगतशुरुफलम् । कुसुमगधसदस्वरशालिता विमलता धनदानमतिभृशम् ॥

  • गुरौ सुतया सति संयुते चिरता चिरतापितशत्रता ॥ १९ ॥