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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२१८

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भाषाढीसहित । ( १९६३ } निस मनुष्यके जन्मकळमें वृश्चिक्ष्रराशिगत बुध बैठा होय वह मनुष्य कृषिप्त में अत्यंत मीतिकरनेवाळा बड़ा मेहनती श्रेष्ठकार्य और सुखकरके हीन हानि और अछम्यहित गुणमें दोष देनेवाला होता है। ॥ ४४ ।। अथ धनरशिगतच्छुधफलम् । वितरणप्रणयो बहुवैभवः कुलपतिश्च कलाकुशलो भवेत् ॥ शशिसुतेऽत्र शरासनसंस्थिते विहितया हितया रमयान्वितः४८॥ मिस् मनुष्यके जन्मकाछमें धनराशिमें बुध बैठा होय बह मनुष्य दान और नग्नता युक बहुत वैभवकरके सहित कुल स्वछमी कलाओंमें कुशल योग्य स्त्रियोंके साथ रमण करनेवाछा होता है । ४६ ॥ अथ मकरराशिगतवुधफलम् । रिपुभयेन युतः कुमतिर्नरः स्मराविहीनतरः परकर्मकृत् ॥ मकरगे सति शीतकरात्मजे व्यसनतः स नतः पुरुषो भवेत् १६ जिस मनुष्यके जन्मकाछमें मकरराशिमें बुध बैठा होय वह मनुष्य शत्रुभयसहित स्टीदुद्धि काम कछारहित पराये कर्मकरनेवाला व्यसनोंकरके नम होता है । ४६ ! अथ कुंभराशिगतबुधफलम् । गृहकलिं कलशे शशिनंदनो वितनुते तनुतां ननु दीनताम् । धनपराक्रमधर्मविहीनतां विमतितामतितापितशत्रुभिः॥ ४७ / निख मनुष्यके जन्मकाळमें कुंभराशिगत बुध बैठा होय वह मनुष्य परमें क्लेश करनेवाला दीनताको बझनेवाळा धन पराक्रम धर्मरहित बुद्धि दोन शत्रुओंकरके संत पित होता है।४॥ अथ मीनराशिगतबुधफलम् । परधनादिकरक्षणतत्परो द्विजसुरानुचरो हि नरो भवेत् ।। शशिसुते पृथुरोमसमाश्रिते सुवदनावदनानुविलोकनः ॥ ४८ ॥ जिस मनुष्य जन्मस्में मीनराशिका बुध बैठा हये वह अमूल्य पराया धन और जायद्दकी रक्षा करनेशळा ब्राह्मण और देवताओंक सेवक भेट स्त्रियों के क्षेत्रों देखनेवछः होता है ॥ ४८ ॥ अथ मेषराशिगतगुरुफलम् । बहुतरां कुरुते समुद्रतीं सुरचितां निजवैरिससुन्नतिम् ॥ विभवतां च मरुत्पतिपूजितः क्रियगतोयगतरुमतिप्रदः ॥४९॥ १३