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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२१७

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( १९२ } जतर निस मनुष्यके जन्म कळमें मिथुन राशिगत दुध बैठा होय वह मनुष्य प्यारके वचन बोलनेको रचनामें चतुर दो भाताका पुत्र शुभ वेषवगळा भोगी स्थान और भोजन करतें सखे! हेतवें { ॥ ३९ / अथ कर्कराशिमतसुधफलम् ।। कुचरितानि च गीतकथादरो नृपरुचिः परदेशगतिर्गुणाम् ॥ किल कुलीरगते शशभृसुते सुरततारतता नितरां भवेत् ॥४०॥ भिक्ष मनुष्पके अभ्मकाळमें कर्कराशिमें बुध बैठा होये वह मनुष्य खोटे चरित्र करनेवाला गीत और कथाका निर्ःदर करने वाला राजसेवी परदेश जानेवाला निरंतर वियोंके साथ भोग करनेकी इच्छावळ होताहै ।। ४० ॥ अथ सिंहराशिगतबुधफलम् । अनृततासहितं विमतिं परं सहजवैरकरं कुरुते नरम् ॥ युवतिद्वर्षपरं शशिनः सुतो हरिगोरिगतोन्नतिदुःखितम् ॥४३it बोलनेत्राळ निस मनुष्यके जन्मकळमें सिंहराशिगत बुधः बैठा होय वह मनुष्य झूठ हीनबुद्धि बंधुगणसे घेर करनेवाः स्रियंके साथ आनंद करनेवाळा उत्रतिरहित दुःखित होता है की ४१ अथ कन्यरागतवुधफलम् । सुवचनानुरदश्चतुरो नरो लिखनकर्मपरो हि वरोन्नतिः । शशिसुते युवतौ च गते सुखी सुनयनानयनाञ्चलचेष्टितैः॥४२॥ निमस मनुष्यके जन्मकाछमें कन्याराशिमें बुध बैठा होय वह मनुष्य श्रेष्ठ वचन बळनेमें तत्पर चतुर छेिड़ाई करनेमें तत्पर श्रेष्ट अननिवाळा सुख/ क्षुद्रनेत्रोंवळे घीके अंचळफी ईच्छारखाने बाह्य दतृ है । ५२ अथ सुलाराशिगतबुधफलम् । अनृतवाग्व्ययभावलू शिल्पवित्कुचरिताभिरतिर्बहुजल्पकः । व्यसनयुङ्मनुजःसहिते बुधेऽत्र तुलयातुलयात्वसता युतः४३॥ निस मनुष्यके अन्मकायमें तुलाराशिमें बुध बैठा होय वह मनुष्य हूँठ बोळनेवाळा सर्च अग्नत्रण शिल्पविद्याक जननेवाछा खोटे चरित्रमें फीतिकरनेवघड बहुत बळनेवाला व्यसनप्त द्वित्र गनेके समग्र और पापयुक्त होता है ॥ ४३ ॥ अथ वृश्चिकराशिगतबुधफलम् । कृपणनातिरतिप्रणयश्रमो विहितकर्मसुखोपहतिर्भवेत । अत्रलभानुसुलेऽलिगते क्षतिवलसतो लसतोपि च वस्तुनः ९४ ॥