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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२१५

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( ६९० ) तच¥भरण अथ कन्याराशिगतभौमफलम् । सुजनपूजनताजनताधिको यजनयजनकर्मरतो भवेत् ॥ क्षितिसुते सति कन्यकयान्विते त्ववनितो वनितोत्सवतःसुखी ३० जिस मनुष्यले भन्मकाछमें कन्याराशिगत मंगळ बैठा होय वह मनुष्य श्रेष्ट अनोकरके ननीय मनुष्योंके साथ सौढप सहित यज्ञ करें और करावे खियोंके दरसवकर्णसे सुची होता है - ३० ॥ अथ तुलाराशिगतभौमफलम् । बहुधनव्ययतांगविहीनतागतगुरुप्रियतापरितापितः वणिजि भूमिसुते विकलः पुमानवनितोवानितोद्भवदुःखितः॥३३॥ मिख मनुष्यके जन्मकाछमें तुलाराशिगत मंगळ बैठा होय वह मनुष्य बहुत धन खर्च करनेवःला अंग बिहीन बड़े जनसे प्रेमरहित संतापको मात्र विकछतसहित द्वियोंसे दुःखको प्रतप्त होता है ॥ ३१ ॥ अथ वृश्चिकराशिगतभमङ्गलम् । विषहुताशनशस्त्रभयान्वृितः सुतसुतावनितादिमहत्सुखम् ॥ वसुमतीसुतभाजि सरीसृपे नृपरतः परतश्च जयं व्रजेत् ॥३२ निख मनुष्यके जन्मकाळमें वृश्चिकराशिगत मंगल बैठा होय वह मनुष्ये विष और अग्नि अथाः अत्रकै भयको मात्र टड्का लडकीके बड़े सैौख्यको प्राप्त राजामें रत शत्रुओंसे नयको स्म त है ॥ ३२ ॥ अथ धनराशिगतभौमफलम् । स्थतुरंगमगन्धसंयुतः परमरातितनुतिदुःखितः । भवति नावनिजे धनुषिस्थिते सुखनितावनिताभ्रमणप्रियः३३॥ जस मनुष्यके जम्मुका|ळमें धनराशीिगत मंगळ बैठा होय वह मनुष्य रथ और घोड़े तथा। करवसहित अणगग्गसे पीड़ित श्रेष्ठ त्रीवाला स्त्री के साथ श्रमकरनेवाला होता है । ३३ ।। अथ मकरराशिगतभौमफलम् । रणपराक्रमतावानितासुखं निजजनप्रतिकूलतया श्रमः । विभवता मनुजस्य धरात्मजे मकरकरोगेव रमा भवेत ॥ ३८॥ जस मनुष्यके जन्ममें मकरराशिगत मंगळ बैठा होय बह मनुष्य युद्धमें पराक्रम नवाला फीके शैब्यको मान्न अपने प्रीमियंक प्रतिकूल बड़े परिश्रमको नेवळ वैभव सः ’नमन छपवासः छैनहै ॥ ३४ ॥ =