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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२११

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{ १८६ } जेंसकामो ण अथ कुंभराशिगतसूर्यफलम् । कलशगामिनि पंकजिनीपतौशठतरो हि नरो गतसौडदः ॥ मलिनताकलितो राहितः सदा करुणयारुणयात्तसुखी भवेत् ११ विस मनुष्यले जन्मकालमें कुम्भराशिमें सूर्य बैठाइय यह मनुष्य शठतासहित मित्रतः हिंद मछिनतःयुक्तः करुणाईन रुधिर मकोपयाळा सुखी होता है ॥ ११ ॥ अथ मीनराशिगतसूर्यफलम् । वहुनं क्रयविक्रयतः सुखं निजजनादपि गृह्यमहाभयम् ॥ दिनपतौ गुरुभभिमतो भवेत्सुजनतो जनतोषदसन्मतिः॥ १२॥ निस मन्यके जन्मछमें मीनराशिगत सूर्य बैठाय वह मनुष्य कय विक्रय करके बहुत धन पानेवाळ अपने मनुष्यसे भयको प्राप्त श्रेष्ठ जनों करके मनुष्योंको तोषकरनेत्रछा भेश्वृद्धि होता है | १२ ॥ अथ मेषराशिगतचंद्रफलम् । स्थिरधनो रहितः सुजनैर्नरः सुतयुतः प्रमदाविजितो भवेत् ॥ अजगतो द्विजराज इतीरितं विभुतयाढतया स्वसुकीर्तिभाक्३३ जेष्ठ मनुष्यके जन्मकादमें मेषराशिगत चंद्रमा बैठा होय वह मनुष्य धनका संग्रह और क्षेषु जनकरके राहिन पुत्र सहित स्त्री करके जीता हुआ वह अद्भुत वैभबसे अच्छे केलें पाताईं { १३ ॥ अथ वृषरशिगतचंद्रफलम् । स्थिरगतिं सुमतिं कमनीयतां कुशलतां हि नृणामुपभोगता ।। वृषमतो द्विगुभृशमादिशेत्सुकृतितः कृतितश्व सुखानि च १४ तिष्ठ मनुष्यके जन्मकाछमें वृषरागत चंद्रमा बैठः होय वह मनुष्य स्थिर गति श्रेष्ठ उद्भव से यमन कुश्छताको माप बहुत नौकरोंवळा श्रेष्ठ कार्यंसे और कुशलता से सैन्य पातवें ॥ १४ ।। अथ मिथुनरशिगतचंद्रफलम् । प्रीयकरः करमस्ययुतो नरः सुतसौख्यभरो युवतिप्रियः ॥ मिथुनराशिगते हिमग भवेत्सुजनतजनताकृतगौरवः ॥१५॥ निस म—थके जन्म कटमें मिथुनराशिगत चंद्रमा पेशा होय वह मनुष्य मिथ करने +झन डॉमें भंशके अक्षरशी रेस्रावळ मैथुत्रके सीरुपसंहित अतिशय फरफे स्त्रियः “द सँभनदा पहिले हो। मनुथ इसके गौरव करते हैं ॥ १९ ॥ ।