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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/२०१

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( १५६ ) इतर जिस मनुध्यते जन्मेकाछमें भेष वृश्चिक राशिगत सनैश्वरको भङ्गछ देखताहोय बहमनूष्य बहूत बोलनेवार धन संपदाकर्के रहित कर्य नाश करनेवाला विशेष धनहीन होता है ॥ ३ ॥ अथ भौमालयस्थे शनौ बुधदृष्टिफलम् । चौर्यकर्मकलहाद्वितत्परं कामिनीजनमतोत्सवं नरम् ॥ जेक्षिते हि कुरुतेऽर्कनंदनो भूमिसूनुभवनाधिसंस्थितः ॥ ४ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकाळमें मेष वृश्चिक राशिगत शनैश्वरको बुध देखताहोय वह मनुष्य चोरी करनेवाला कळहमें तत्पर स्त्री और उत्सव रहित होता है । ४ ।। अथ भोमालयस्थे शनौ गुरुदृष्टिफलम् । सुखधनैः सहितं नृपमंत्रिणं नृपसमाश्रितमुख्यतयान्वितम् ॥ सुरपुरोहितवीक्षितभानुजीवनिजवेश्मगतः कुरुते नरम् ॥ ५॥ जिस मनुष्यके जन्मऋाळमें मेष वृश्चिक राशिगत शनैश्वरको बृहस्पति देवताहेय बद्द मनुष्य सुख और धनकरके सहित राजाको मंत्री और राधाके आश्रयकरके मुख्यताको प्राप्त होतR ॥ ५ ॥ । अथ भौमालयस्थे शनौ श्रुणुदृष्टिफलम् । बहुप्रयाणाभिरतं विकांतिं पापाङ्गनासक्तमातिं विचित्तम् ॥ करोति मत्यै क्षितिजालयस्थो भानोस्तपूज़ भृगुजेन दृष्टः ॥६॥ जिस मनुष्यके जन्मकळमें मेष वृश्चिक राशिगत शनैश्चरको शुक्र देईताय वह मनुष्य बहुत्र यत्रकरनेवाळा कांतिरंहित पापिनी सीमें आसक्त बुद्धिकरके दुःखी होतहैि ॥ ६ ॥ अथ भृगुजालयथ शनौ रविडाष्टिफलम् ! विद्याविचारे प्रचुरोतिषक्ता परान्नभो विधनश्च शतः । भवेन्नरस्तिग्मकरेण दृष्टं मुर्यात्मजे भार्गववेश्मसंस्थे ॥ ७॥ निस मनुष्यके जन्मकळ्ॉमें यूथ तुलाराशिंगत शनैश्वरको सूर्य देखता होय वह मनुष्य वि याने विचारमें अधिक बड़। वह पराया अत्र खानेवळ धनहीन शांत होता है । ७ । अथ भृगुलयस्थे शनौ चंद्रदृष्फिलम्। नृपप्रसादाप्तमहाधिकारं योषाविषाम्बरजातसौख्यम् ॥ बलान्भितं सञ्जनयेन्मनुष्यं मंदः सितचै हरिणकदृष्टे ॥ ८ ॥ मिस् मनुष्यके जन्पकाळमें खूप तुला राशिगत शुक्रको शनैश्वर देखनाय बद्द मनुष्य राजाकी

  • कर बड़े अधिकारको प्राप्त की और भूषण तथा वनोंके सौख्पको माप्त बळयात

[ # $ ८ ॥