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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/१९७

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जनरर्षे ( १७२ ) जिस मनुष्यके जन्मकालमें सिंह राशिगत शुकको सूर्य देखताय वह मनुष्य स्पदंकरके चित्तवृत्तिको बड़ानेचदा स्वके आश्रयसे धनको छाभकरने ळा अथवा ऊँट गधे घोड़ों करके धन लाभ करता है ॥ २५ ॥ अथ सिंहराशिगते शुक्रे चंद्रदृष्टिफलम् । नूनं जनन्याश्च भवेत्सपत्नी पत्नीविरोधो विभवोद्भवश्च ॥ यस्य प्रसूतौ दनुजेंद्रमंत्री चंद्रेक्षितः सिंहगतो यदि स्यात्॥२६ निस मनुष्यके जम्मकालमें सिंहराशिगत शुक्रको चंद्रमा देखता हूय उस मनुष्यकी माता दो होती हैं और वेह स्खसेि विरोध करनेवळ ऐश्वर्यसहित होता है ॥ २६ ॥ अथ सिंहराशिगते शुक्रे भौमदृष्टिफलम। नृपश्रियं धान्यधनैरुपेतं कंदर्पजातयसनाभिभूतम् ॥ करोति मर्ये मृगराजसंस्थो भृगोस्तनूजोऽवनिजेन दृष्टः ॥२७॥ जिस मनुष्यके जन्मकळमें सिंहराशिगत शुक्रको मंगल देखता होय वह मनुष्य राजका प्या अन्न धन सहित कामकछाके व्यसनैसहित होता है ॥ २७ ॥ अथ सिंहराशिगते शुक्रे बुधदृष्टिफलम् । धनान्वितं संग्रहचित्तवृत्ति लुब्धं स्मराधिक्यविकारनिंद्यम् ॥ ॥ दैत्येंद्रमंत्री कुरुते मनुष्यं सिंहस्थितः समसुतेन दृष्टः २८ ॥ जिस मनुष्य जन्मकालमें सिंहराशिगत चुकको बुध देखताहूय वह मनुष्य धनसहित संग्रह करनेमें चित्त वृत्तिवळा भी कामदेवकी अधिकतासे बुरे विकारोंको प्राप्त होता है२८ अथ सिंहराशिगते शुक्र गुरुदृष्टिफलम् । नरेंद्रमंत्री धनवाहनाच्यो बह्वङ्गनानंदनभृत्यसौख्यः॥ त्रिख्यातकर्मा च भृगोस्तनूजे जीवेक्षिते सिंहगते नरः स्यात्।२९ निम मनुष्यले जन्मकळमें सिंहराशिगत शुकको बृहस्पति देवताहोय वह मनुष्य राजाका मंत्री धन बइन सहित बहुत सी पुत्र नौकरोंके सौख्यवाळा मासिकाओंक करनेवाळा इना के 4 १५ ॥ अथ सिंहशिगते शुक्रे शनिदृष्टिफलम् । नृपोपमं सर्वसमृद्धिभाजं दंडाधिकारेष्यथ वा नियुक्तम् ॥ करोति मर्ये मृगराजवर्ती वैत्यार्चितः सूर्यसुतेन दृष्टः ॥ ३० ॥