...- - , - - ( ५७० ) भर भथ बुधवेश्मगते शुक्रे बुधष्फिलम् ।। आशं महावाद्दवित्तवृद्दि सेनापतित्वं परिवारसौख्यम् ॥ । कुर्यान्नराणानुशनाः प्रवीणं बुधबॅसंस्थश्च बुधेन दृष्टः ॥ १६ ॥ अत्र मनुष्यके जन्मकळमें मिथुन कन्या राशिगत शुक। बुध देखताहूय वह मनुष्य चतुर बड़ा भारी गहन और धनकी वृद्धिवान फनका मालिक पारवारके सौख्यसहित चुदिन् होताहै १६ अथ बुधवेश्मगते शुक्रे गुरुदृष्टिफलम् । सबुद्धिवृद्धैिर्द्रवैभवाढचः प्रसन्नचेताः सुतरां विनीतः । मत्यभवेत्सॅम्यहोपयाते दृष्टे सिते देवपुरोहितेन ॥ १७ ॥ निस मनुष्यके जन्मकाळमें मिथुन कन्या राशिगत शुकको वृहस्पति देखताय वह मनुष्य श्रेष्ठ बुद्धिवृद्धिसशि बहूत वैभव करके हित मसन चित्त निरंतर नभ होताँहै॥ १७ अथ बुधवेश्मगते शुक्रे शनिदृष्टिफलम् । पराभिभूतं चपलं विविक्तं सुदुखितं सखीजनोज्झितं च । मत्यै करोत्येव भृगोस्तनूजः सोमात्मजौं रविजेन दृष्टः॥१८॥ निस मनुष्यके जन्मकाळमें मिथुन कन्या राशिगत शुकको शनैश्वर देखताय वह मनुष्य अपमान करके दिन चपळ स्वभाव दुःखसहित मनुष्यों करके त्यागा हुआ होता है। ॥१८॥ अथ कर्करशिगते शुक्रे रविदृष्टिफलम् । सरोषयोषाकृतहर्यनाशः स्यात्पूर्वः शत्रुजनाभिभूतः । दैत्यार्चिते कर्कटराशियाते निरीक्षितेऽहर्पतिना प्रसूतौ ॥ १९॥ त्रिख मनुष्यके अन्मकाढमें की शिगत शुकको सूर्य देखताय वह मनुष्य क्रोध करके अंकृत हर्यक नाम करनेवाला वैरियों करके पीडित होता है ॥ १९ ॥ अथ कर्कराशिगते शुक्रे चंद्रदृष्टिफलम् । कन्याप्रजापूर्वकपुत्रलाभमय सपत्नीं बहुगौराणि । कुर्यान्नराणां हरिणाङ्कदष्टः कलीरगो भार्गवनामधेयः ॥ २९ ॥ निम मनुध्यते जन्मकळमें कईराशिगत शुकको चन्द्रमा देखता होय तो चंइ मनुष्य फदिदं इह पीसे छड़ द करता है और माता व विमाताका मान करने होता है A २ ० । ।
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