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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/१९१

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( १५६ ) भरष । अथ शनिक्षेत्रगते गुरौ चंद्रदृष्टिफलम् ।। कुलोद्वहस्तीव्रमतिः सुशीलो धर्मक्रियायां सुतरामुदारः ॥ नरोभिमानी पितृमातृभक्तो जीवे शनिकोशगतेंदुदृष्टे ॥ ३८॥ जिस मनुष्यके जन्मकाछमें शनैथरकी राशि १० । ११ में बृहस्पति मैटाहेय और दमा करके दृष्ट होंय वह मनुष्य कुळको धारणकरनेवळ तीव्र बुद्धि शीलवान् धर्मक्रियः रनमें उदार अभिमानी माता पिताका भक्त होता है ॥ ३८ ॥ अंधे शनिक्षेत्रगते गुरौ भौमदृष्टिफलम् । स्यादर्थसिद्धिनृपतेः प्रसादात्कीर्तिः सुखानानुपलब्धिरेव । मृतौ सुरेज्ये शनिमंदिरस्थे निरीक्ष्यमाणे धरणीसुतेन ॥ ३९ / निस मनुष्यले जन्मकालमें मकर कुंभ राशिगत बृहस्पतिको मंगळ देतखाय बहू नुष्य रनकी कृपा से धनकी सिद्दिको प्राप्त और सुखकी अंत्रिकरनेघळा होताहै ॥ ३९ ॥ अंथ शनिक्षेत्रगते गुरौ बुधदृष्टिफलम् । शांतं नितांतं वनितानुकूलं धर्मक्रियाएँ निरतं नितांतम् ॥ करोति मत्थं मरुतां पुरोधा बुधेन दृष्टः शनिमंदिरस्थः ॥ ४० ॥ मिस मनुष्यके जन्मकालमें मकर कुंभ राशिगते बृहस्पतिको बुध देखताहोय वह मनुष्य न स्वभाव नितर स्त्री के वशीभूत धर्मक्रियाओंमें निरंतर तत्पर होताहै ॥ ४० ॥ अथ शनिक्षेत्रगते गुरौ भूरुहृष्टिफलम् । विद्याविवेकार्थगुणैः समेतः पृथ्वीपतिप्राप्तमनभिलाषः। स्यात्पूरुषः सूर्यसुतीसंस्थे जीवे प्रसूतौ भृगुजेन दृष्टे ।। ४१ ।। लिप मनुष्यके जन्मकाळमें मकर कुंभ राशिगत बृहस्पतिको शुक देखताय वह मनुष्य या विवेक धन गृणकरके सहित राना करके मनकी अभिलाषाको प्रश्न करताबें ॥ ४१ ॥ अथ शनिक्षेत्रगते गुरौ शनिदृष्टिफलम् । कामं सकामं सुगुणाभिरामं सद्मार्थप्राप्तिं धनधान्ययुक्तम् ॥ स्यातं त्रिनीतं कुरुते मनुष्यं मंदेशितो मंदगृहस्थजीवः ॥ ४२ ॥ मिस मनुयले जन्मक(छमें मकर कुंभ राशिगत बृहस्पतिको शनैशt देखताय वह मनुष्य =भनाको प्राप्त अष्ट गुणैसति मकान और अर्थकी प्राप्तिसहित धनधान्ययुक्त प्रसिद्ध व्रत अनि केहै । ४२ ॥ इति शूनिक्षगते गुरी ग्रहदूटिफळप् । ५