लिभरप्रै ( १९ २ ) जिस मनुष्यके जन्म्फमें खु तुळा राशिमें बुध बैठा होय और शुझकरने दृष्ट होय ते वह मनुष्य अत्यंत सुंदर वेधशाळा वस्त्र और भूषणकरके युक्त स्त्रियोंको कामदेवं और कामकरके बड़े हर्षक प्राप्त अत्यंत चतुर उदार अष्ठभाग्यवाळा होता है ॥ । ११ ॥ अथ शुक्रॐ कुधे शनिदृष्टिफलम् । कलत्रभित्रभजयानपीड़ासंतप्तचित्तं सुखवित्तहीनम् । कुर्यान्नरं शत्रुजनाभिभूतं मेदेक्षितो ज्ञः सितधामगामी ॥ १२ ॥ स मनुध्यंके जन्मकाछमें खूष झूठा राशिगत युधक शनिश्चर देखता होय वह मनुष्य वी पुत्र मित्र और वाहनके दुःख सेतमधित्त सुख और धमकरके हीन होतॐ ॥ १२ ॥ अथ स्वक्षेत्रस्थे बुधे रविदृष्टिफलम् । सत्योपेतं चारुलीलाविलासं भूमीपालान्प्राप्तमानोन्नतिं च । चञ्चत्क्षीणं चापि कुर्यान्मनुष्यः स्वक्षेत्रस्थधंदपुत्रोर्कदृषH१३॥ निस मनुष्यके जन्मकळिमें मिथुन कन्या राशिगंत बुधको सूर्य देखता हूय वह मनुष्य सस्यसदिन सुंदरळछाक विंटास करनेवाळा राजकरके मान और उन्नतिको प्राप्त चंचलतर- हिन होता है की १३ ॥ अथ स्वक्षेत्रस्थे भृथे चंद्रदृष्टिफलम् । अनल्पंजरुपोऽमृततुल्यभाषी कलिप्रियो राजसमीपवर्ती । भवेन्नरः सोमसुते स्वगेहे निरीक्ष्यमाणे मृगलाञ्छनेन ॥११॥ लिख मनुष्यके जन्मकाछमें बुध मिथुन कस्या राशिमें बैठा होय और चंद्माकरके देखाग्या होय तौ ह मनुष्य बहुत वोळनेवाछा बहुत मीम व बोले लँड़ाई जिस्को प्यारी राजाके पास रहनेवाछा होता है । १४ ॥ अथ स्वक्षेत्रस्थे बुधे भौमदृष्टिफलम् । प्रसन्नमात्रं कुटिलं कलाशं नरेंद्रकृत्ये सुतरां प्रवीणम् ॥ जनप्रियं संजनयेन्मनुष्यं भौमेक्षितो ज्ञः स्वगृहेधिसंस्थः ॥१॥ तिस्र मनुष्यके जन्मकाछमें कन्या मिथुन राशिगत बुधको मंगळ देखता होय बह मनुष्य प्रमत्र देइ जुगळखर कस्टाऑको जाननेवाळा रांजाके कृत्यमें निरंतर प्रवीण मनुष्य यारा हा है । १९ / अथ स्वक्षेत्रस्थे बुधे गुरुदृष्टिफलम् । `सामर्थेविराजमानं सद्राजमानाप्तपदाधिकारम् ॥ सुतं प्रकुर्यान्निजमंदिरस्थः सोम्यः प्रहृष्टः सुरपूजितेन ॥ १६
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