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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/१७५

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( ११० ) आतियभर नेिव मनुष्यके जन्मछमें मेल सुधि राक्षीमें बुध बैठा होय उको चंद्रमा देखताहोय वह मनुध्य श्रेष्ठ गीत नृत्यादिमें पीति करनेवाख्य कामसहित में प्रीतिकरनेवांछ वाइन और नरकरके सहित चुगला होताहै ॥ २ ॥ अथ मोमयूहे कॅधे भैमढाष्फिलम् । भूपप्रियं भूरिधनं च शूरं कलाप्रवीणं कलहोद्यतं च ॥ क्षुधान्वितं सञ्जनयेन्मनुष्यं सौम्यः कुजनैं कुसुतेन दृष्टः ॥३॥ निस मनुष्यके जन्मकाछमें मेष धृश्चिक राशिगत बुधको मंगळ देखताहो वह मनुष्य राजकी व्यारा बहूत धनवाला शूरवीर कछरोंमें चतुर छड़ाई करनेमें उडत झुधफरके सहित होतहै ॥ ३ ॥ अथ भौमगेहे बुधे गुरुदृष्फिलम् । सुखोपपन्नं चतुरं सुवाक्यं कांतासुतावैः सहितं प्रसन्नम् ॥ करोति मर्यं कुजगेहगामी सोमात्मजो वाक्यतिना प्रहृष्टः ॥४॥ स मनुष्यके जन्मकाछमें मेष वृश्चिक राशिगत बुधको बृह्स्पति देखताहोय वह मनुष्य सुवकरके सहित चतुर श्रेष्ठ वाणी बौळनेवछा स्त्री पुत्रादि सहित प्रसन्न क्ति होता है । ४ । अथ भौमगेहे बुधे गुदृष्टिफलम् । कांताविलासं गुणगौरवाव्यं सुहृत्प्रियं चारुमतिं विनीतम् ॥ करोति जातं शशिजः कुजद्दी संस्थश्च शुक्रेण निरिक्ष्यमाणः तिस मनुष्यके जन्मकालमें मेषं वृश्चिक राशिमें बुध बैठा होय उस्को शुक देखता होय यह मनुष्य त्रियके द्याध विछास करनेवाला गुण और गौरवसहितं मित्रोंक प्यारा सुंदर बुद्धि छः नम्रताड़ित होता है ॥ ९६ ॥ अथ भौमगेहे वृधे शनिदृष्टिफलम् । सुसाहसं चोग्रतरस्वभावं कुछोकलिप्रीतिमसाधुवृत्तिम् ॥ करोतेि मर्ये इरिणाङ्कसूनुर्भामर्द्धसंस्थः शनिना प्रहृष्टः ॥ ६ ॥ जिस तुझुके अन्भऋमें मेष वृश्चिक राशिमें बुध वैश्वा )य उसको शूनियर देखताबोये ह मनुथ श्रेष्ठ खाइन्छ कूरभावान्न कुछ फळझकरनेवाला भीति और श्रेष्ठवृत्तिर्भ त की है । ६ ।।