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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/१७०

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भवार्ड १४५ } जिस मनुष्यके जन्मकोछमें कीराशिमें मंगळ बैठाहय व उसको चैमा देखनाथ वह मनुध्य रोगकरके सहित गंईवीन शोच करनेवाळ कुरूपवान् समवृति हैन हेत३ि१ % # अथ कर्कस्थे भने बुधदृष्फिलम् । मित्रैर्विमुक्तोषकुटुम्बभारः पापम्रचारः खलचित्रवृत्तिः । बुधेन दृष्टे सति कर्कटस्थे भौमे नरः स्याद्यसनाभिभूतः२॥ निस मनुष्यके जन्मकाळमें फर्फराशिमें मंगळ बैठाय स्को ध देखताबेंगे वह मनुष्य मित्रकरके रहित थोड़े कुटुंबवळ पापका प्रचार करै दुष्टचित्तत्राळा होतहैि ॥ २१ ॥ अथ कर्कस्थे भौमे गुरुदृष्टिफलम् । नरेंद्रमंत्री गुणगौरवाच्यो मान्यो वदान्यो मनुजः प्रसिद्धः । कुलीरसंस्थे तनये धरिया निरीक्षिते चित्रशिखण्डिजेन॥२२॥ जिस मनुष्यके नन्मकाळमें कर्कराशिमें मंगळ बैठाहूय उस्को बृहस्पति देवताय ते वह मनुष्य राजाका मंत्री गुण और गैरवसहित बड़े मनकरके युक्त पसिद्ध होता है । २३ # अथ कर्कस्थे में झ्णुहष्फिलम् । अर्थक्षयो दुष्पेंसनेन नूनं निरंतरानर्थसमुद्भवः स्यात् । भवेन्नराणां भृगुणा प्रहृष्टे त्वङ्गरके कर्कटराशिसंस्थे ।। २३ ।। जिस मनुष्पके जन्मकालमें कर्क राशिमें मंगळ बैठाय च दस्को शुक देवताय वह मनु ष्य चुरे कामोंमें धनका नाशकंरनेवाला और रातदिन बुरे कामोंका विचारहरता है ५२३ अथ कर्कस्थे भौमे शनिदृष्टिफलम् । कीलालधान्यादिधनः सुकौंतिर्महीपतिप्राप्तधनो मनुष्यः । महीसुते कर्कटराशिसंस्थे निरीक्षिते सूर्यसुतेन भूतौ ।। २४ ।। जिस मनुष्यके अम्मकाळमें कर्क राशिमें मंगळ बैठाइय उस्को शैनेर देतय हैः बह मनुष्य जळत्पन्न धान्यकरके धनको माप्त श्रेष्ठ कृतिवाद कर के न मम फले नॉछ होता है | २४ / अथ सिंहस्थभौमे रविष्टट्फिलम् । हितप्रकर्ताऽभिमतेषु नूनं द्विषजनानामहितप्रदाता । वनाद्रिकुजेषु कृतप्रचारः सिंहे भतीजे रक्षिण महणे ॥ २५॥ प्रिय मनुष्यके जन्मेकाछमें सिंहरासिगत मंगछको सूधे देवताथ यह मनुष्य अपने प्रति मीति करनेथा और आधुभसे वैरकरचेवळ प्रनषड्रेन ऑमें रहनेवभ होता है ३५