भाषीकासहित। {१३८५ . - अथ गुरुगृहे रवं श्रुणुदृष्टिफलम् । सुगंधमाल्यांबरचारुयोषाभूषाविशेषानुभवाप्तसौख्यः । भवेन्नरो देवपुरोहितवें प्रद्योतने दानवमन्यदृष्टे ॥ ३६ ॥ जिसमनुष्यके जन्मकाळमें धन और मीन राशिमें तूर्य बैद्याय उस्क शुरू देखताडय तो वह मनुष्य सुगंधिवळ माल और सुगंधित वस्त्र धारणकरनेवाच्या संदर स्त्री और आभूषणों सौख्य भोगताहै ॥ ३६ ॥ अथ गुरुग्रहे रयौ शनिदृष्टिफलम् । परान्नभुलीचनरैः प्रवृत्तश्चतुष्पदीतिधरो नरः स्यात् । सूर्यं सुराचर्यगृहे प्रयाते निरीक्षिते भानुसुतेन मूत ॥ ३७ ॥ निसमनुष्यके जन्मकालमें धन और मेनिराशिमें सूर्य बैठाय और उस्को शनिश्चर देवताः होय तो वह मनुष्य पराये अन्नको भजनकरनेवाछा नीचपुरुषोंमें प्रवृत्ति करनेवाला चौपायो मीतिकरनेवाला होताहै ॥ ३७ ॥ अथ शनिहे रवौ चन्द्रदृष्टिफलम्। नारीप्रसङ्कन गतार्थसौख्यो मायापदुद्दीचलचित्तवृत्तिः । भवेन्मनुष्यः शनिवेश्मयाते सहस्ररश्मौ हिमरश्मिदृष्टे ॥ ३८॥ जिस मनुष्यले जन्मकालमें मकर औरं कुंभ राशिमें सूर्य बैठाहोप और उस्को चंद्रमा देखाः दोय वह मनुष्य स्त्रीके संगकरके धन और सौख्यका नाशकरनेवाळा मायाकरनमें चुतुर चंबई चित्तवला होता है । ३८ / अथ शनिहे रवौ भौमदृष्टिफलम् । परकलहहतार्था व्याधिवैरप्रतप्तस्त्वतिविकलशरीरोऽत्यंतचिं तामेतमभवत् िननु मनुष्यो संभवे तिग्मरश्मौ गतवति सु तगेहे इष्टदेहे कुजेन ॥ ३९ ॥ जिस मनुष्पके जन्मकाळमें मकर कुम्भ राशिमें सूर्य बैठा होप और उस्को हे मंगह देखता होय वह मनुष्य शत्रुओंसे झगड़ाकरके धनको नाशकरनेवाला और व्याधि दैरकरके संतापित अत्यंत व्याकुळदेह बहुत चिंतावाछा होता है ॥ ३९ ॥ अथ शनिग्रहे रवौ बुधदृष्फिलम् । क्लीबस्वभावः परचित्तहारी साधूझितः शूरतरो नरः स्यात् । दिवाकरे शीतकरारमजेन दृष्टे प्रसूतौ शनिमंदिरस्थे ॥ ४० ॥ जिस मनुष्यको जन्मकालमें मकर व कुम्भ राशिमें सूर्य श्रेष्ठ होय उस्को भूध देश है
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