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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/१४९

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जातकरण १२४ ) अथ निजागारगते रवौ शनिदृष्टिफलम् । शठो नरः कायैविघातकृत संतापयेदात्मजनांश्च जूनम् ॥ नरो मृगेंदोपगते दिनेशे दिनेशपुत्रेण निरीक्ष्यमाणे ॥ ३१ ॥ निउमनुष्यके जन्मकाछमें सूर्य सिंहराशिमें बैठाय और उस्को शनिभर देखताय वह मनुष्य शठ कामका पिगाड़नेवाछा अपने मनुष्योंकरके संतापको प्राप्तहोताहै ॥ ३१ ॥ अथ गुरुग्रहे रवौ चंद्रदृष्टिफलम् । कामकांतिसुतसौख्यसमेतो वाग्विलासकुशलः कुलशाली । स्यान्नरः सुरपुरोहितभस्थे भास्करे हिमकरेण हि दृष्टं ॥३२॥ निसमनुष्यके जन्मकटमें सूर्य धन मीन राशिमें बैठाय और उस्को चंद्रमा देखता होय देह मनुष्य शोभायमान हवाळा पुत्र सौख्यसहित धाणीके विकासमें कुशळ कुळवान् । होताहै ॥ ३२ ॥ अथ गुरुगृहे रवौ भौमदृष्टिफलम् । संग्रामसंप्राप्तयशेविशेषो वक्ता विमुक्तानुजनानुसङ्गः ॥ स्थिराश्रमोजीवगृहस्थितेॐ भौमेन दृष्टे पुरुषः प्रचण्डः ॥३३ निसमनुष्यले जन्मकाळमें धन मीन राशिमें सूर्य बैठाय और उस्को मंगल देखताहोय तो वह मनुष्य संग्राममें विशेष यशको पानेवाला वक्ता होताहै और अपने मनुष्योंके संगसे रहित स्थिरआजीविका करनेवाछा अचण्ड होता है । ३३ ॥ अथ गुरुहे रवौ बुधदृष्टिफलम् । धातुक्रियाकाव्यकलाकथाज्ञः सद्वाक्यमंत्रादिविधिप्रवीणः ॥ सतांमतः स्यात्पुरुषो दिनेशे सौम्येक्षिते जीवगृहोपयाते ॥३० भिसमनुष्यको जन्मकाछमें थन और मीन राशिमें बृहसंति वैठाय और उस्को बुध देवता होय दो वह मनुष्य धातुक्रिया और काय कळा और कथाओंका जाननेवाला श्रेष्ठशक्य और श्रेष्ठ मंत्रदिकी बिमेिं चतुर सपुरुषंकी संमतिसहित होता है ॥ ३४ ॥ अथ गुरुर्दे रवौ गुरुदृष्टिफलम् । नृपालमंत्री कुलभूमिपालः कलाविधिज्ञो धनधान्ययुक्तः ॥ विद्वान्पुमान्भानुमतीयगेहे संदृष्टदेहेऽमरपूजितेन ॥ ३८॥ निखमनुष्यले जन्मकाछमें धन मीन राशिमें सूर्य वैश्वाद्य और बृहस्पतिकरके दृष्टहोय न्हें वह मनुष्य गतिका मंत्री अपने कुलमें राम कटाकी विधि माननेवाळा धनधान्यसहित

  • िहेहै = ३५ ॥