भाषाटीलांस है { १ २ ३ } अथ निजागारगते रवी चंद्रपूटिंफलम् । धूर्ता गभीरः क्षितिपालमान्यो धनोपलब्धार्थयुतः प्रसिद्धः । मित्र निजक्षेत्रयुते प्रसूतौ नक्षत्रनाथेन निरीक्ष्यमाणे ॥ २६ # निसमनुष्यके जन्पकळमें सूर्य सिंहराशिमें बैठाहय और उस्क चंद्रम देवताहस्य तं वह भनुष्य धूर्त और गंभीर रानाकरके मानक माप्त धनी मानिखे धनवान् प्रसिद्ध होताहै अथ निजागारगते रबौ भौमदृष्फिलम् । नानाङ्गनाप्रीतिरतीव धूर्तः कफात्मकः कूरतरश्च शूरः । महेद्यमः स्यान्मनुजः प्रधानः सिंहस्थितेॐ कुसुतेन दृष्टे॥२ ।। जिसमनुष्यके जन्मकालमें सूर्य सिंहराशिमें बैठाहोय और उस्को योः मैगळ देखता होय वह मनुष्य अनेक स्रियोंमें प्रति करनेवाला अत्यंत धूर्त कफप्रकृतिवाळा बड़ा वीर उद्यमः होता है ॥ २७ ॥ अथ निजगारगते रवौं बुधदृष्टिफलम् । धूतो नृपानुव्रजनः सुसत्वो विद्वत्प्रिपो लेखनतत्परा । भवेन्नरः केसरिणि प्रयाते दिवामणौ सौम्यनिरीक्ष्यमाणे ।।२८।। जिसमनुष्पके अन्मकळमें सूर्य सिंहशिमें बैठाहूय और उसको बध देखताहेय वह मनुष्य धूर्त रानाकी अज्ञामें चछनेवाळा बछवान् पंडितोंमें मीतिकरनेवका देशहरेनेमें तसर होताहै ॥ २८ ॥ अथ निजागरगते रवौ गुरुदृष्टिफलम् । देवालयारामतडागवापीनिर्माणकर्ता स्वजने प्रियश्च ॥ भवेन्नरो देवपुरोहितेन निरीक्षितेनैं मृगाजसंस्थे ॥ २९ ॥ निष्ठ मनुष्यके जन्मकाळमें सूर्य सिंहशिमें बैठाडोय उस्को बृहस्पति देवताय मुद्दे । मनुष्य देवताओंके स्थान और तालाब बावड़ीका बनानेवाछा अपने देतेचे पोति करनेवाला होतहै ॥ २९ ॥ अथ निजागारगते रवौ भूर्दृष्टिफलम त्वग्दोषरोषाषयशोभिभूतो गतोसवः स्वीयजनोज्झतश्च ॥ # स्यान्मानवः सत्यद्याविहीनः पश्चाननेकें भूर्जेन दृढं । ३० । जिसमनुष्यके जन्मकाळमें सिंहराशिमें सूर्य प्रेमहोय और उस्को कुक देशहेब ते वह मनुष्य त्वबाने दोषबछा क्रोध सहित अपयशका भाभी उसनवरहित असे अनेक . देशाः हुआ संप और दयारहित दोतहै ॥ ३० ॥
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