आष्टीकसहित । ३ ११ ३ अथ भौभगृहे रवौ शनिदृष्फिलम् | उत्साहहीनो मालिनोति दीन दुःखान्वितो वै त्रिमतिर्नरस्या कांते नलिन्याः क्षितिजालयस्थे प्रसूतिकाले रविजेन दृष्टे । जिस मनुष्यके जन्मकाळमें सूर्य मेषवृश्चिक राशिमें बैठाहय उम्को छू देस्ताय वह मनुष्य उसहर हित मलीन अत्यंत दीन दुःखसहेत बुद्धिहीन हैनहै । ७ । अथ शुकगृहे रवौ चंद्रदृष्टिफलम् वराङ्गनाप्रीतिकरो नितांतं स्याद्भरिभार्यः सलिलोपजीवी दिनाधिराजे भृगुजालयस्थे कलानिधिप्रेक्षणतां प्रयाते । ८ ।। निस मनुष्यके जन्मकाळमें सूर्य वृष वा तुला राशिमें बैठाय और उस्को केंदभ देवदह होय वह मनुष्य श्रेष्ठस्रियोंसे भीप्तिकरंनेवाल। बहुत खियोवाय् लुके व्यापारसे अधिक कश् नेवाळा होताहै । ८ अथ ऋगृहे रवौ भौमदृष्टिफलम् । सामधीरोतितरां महौजाः सुसाहसप्राप्तधनोरुकीर्तिः क्षीणो नरः स्याद्गुमंदिरस्थे सहस्ररश्मीौ कुसुतेने दृष्टे ॥ ९ ॥ जिस मनुष्यके जन्भकछमें सूर्यं दृषु वा तुलाराशिमें बैठाहूय उस्को मंगळ देखताहय मनुष्य संग्राममें धरजतळाअत्यंत जवळा श्रेष्ठसाहसक्के धनको मापकरवाळा और यश हेतवें ॥ ९ अथ शुक्रगृहे रवौ बुधदृष्टिफलम् संगीतसत्काव्यकलाकलापे लेखक्रियायां कुशलो नरः स्यात् । प्रसन्नमूर्तिभंशुवेश्मयाते प्रद्योतने सोमसुतेन दृष्टे ॥ १० ॥ जिस मनुष्यकै मन्मकालमें सूर्य वृष वा तुळशछिमें बैठा होय और उस्को दुध देखन होय तौ वह मनु | संगन दिया और सत्काव्यकी कलाओंझे समूहको करने और लेखक क्रियमें कुशछ अमत्रमूर्ति होता है । १० ॥ अथ शुक्रगृहे रवौ गुरुदृष्टिफलम् वंशानुमानं नृपतिप्रधानः सद्रत्नभूषाढविणान्वितो वा । ।। ३१ / भीरुर्नरः शुकगृहं प्रयाते दृष्टे रवौ देवपुरोहितेन निस भनुगुको जन्मकमळमें सूरी वृष वा तुलाराश्चिमें मैडा होय और उसे अहस्पति ऑक्ष ! धर्म देखताइप यह मनुष्य अपने वंशके समान राभाका प्रधानमंत्री श्रेष्ठरल और सहित डरपोक होत है ॥ ११ ॥ ३६
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