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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/१४३

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( ११८) आतकार - मिसमनुष्यके अन्मकछमें भेषवृश्चिकराशिमें स्थित सूर्यको चंद्रम देखताय तो वह मनुष्य ६ नो और ड्री सहित बहुत नौकरोंछा कोमल और निर्मला देहवाळा अपना घर उस्को वड़ व्य होताहै । २ । अथ भोभगृहे रवौ भौभदृष्टिफलम् । क्रूरो नरः संगरकर्मधीरधरक्तनेत्रांश्रिरलं बलीयान् ॥ भवेदवश्यं कुजगेहसंस्थे दिवामणौ शोणिसुतेन दृष्टे ॥ ३ ॥ जिसमनुष्यके जन्मकाढमें सूर्य मेष वृश्चिक राशिगत बैठाय और उस्को मंगळ देखता हूय वह मनुष्य कूर ईसंग्राममें धीर और आंखें पैर जिने लाळचवें और पूर्ण बछवान् होना है अथ भोमगृहे रवौ बुधदृष्टिफलम् । सुखेन सत्येन धनेन हीनः प्रेष्यः प्रवासी मलिनः सदैव । भवेदवश्यं परवान्मनुष्यः सहस्ररश्मौ कुजभे ज्ञदृष्टे॥ ६॥ विस मनुष्यके जन्भकाछमें सूर्य मेष वृश्चिक राशिमें बैठाहय और उस्को बुध देखता होय यह मनुष्य सुख और पराकम तथा धनकरके हीन दूतोंका काम करनेवाळ परदेशमें बाद करे हमेशा मीन शत्रुओंकरके सहित होताहै ! ४ ॥ अथ भौमगृहे रवौ गुरुदृष्टिफलम् ।। दाता दयालुर्बदुलार्थयुक्तो नृपालमंत्री कुलधुर्यवर्यः । स्यान्मानवो भूतनयालयस्थे पत्यौ नलिन्याः किल जीवदृष्टे ६ एलिस ननुष्यके सन्मकाछमें सूर्य मेषवृश्चिक राशिमें बैठाय उसके बृहस्पति देखता होय वद मनुष्य नाका मंत्री दाता द्यावा बहुत धनवाळा अपने कुलमें अग्रणीय(भैष्ट ) होता ३ ४ ५ ! अथ भोमगृहे रवौ भृगुदृष्टिफलम् । हीनाङ्गनाप्रीतिरतीव दीनो धनेन हीनो मनुजः कुमित्रः॥ त्वग्दोषयुकः क्षितिपुत्रगेहे मित्रेधिसंस्थे भृगुपुत्रदृष्टे ॥ ६ ॥ निघ मदुरले जन्मकर्में ये मेष वृश्चिकराशिमें बैठाय और उस्को शुक देखता होय इझ ऑनुष्य (की औके साथ भीतिकरनेवैख अत्यंत दोन धनकरके हीन दुष्टमित्रोंवा अं, 3 की . लयमें बितर होता है ॥ ६ ॥ है