जर १६ ) मिस मनुष्यके जन्म कळमें कर्क, वृष, मेष, राशिचत चदमा लनमें बैशाहूय वह मनुष्य चतुर रूमन धन और भोगमें श्रेष्ठ गुणोंकरके सहित होताहै और जो कर्क वृष, मे,राशिके विना अन्यराशियमें चंदमा ललमें बैशहोय ते वह मनुष्य उन्मत्त यानी मतवाळा नीच बझेरा विकछह गुंगा होता है ॥ १ ॥ अथ धनभावस्थितचंद्रफलम् । सुखमजद्व्युतो विनीतो भवेन्नरः पूर्णविधुर्दितीये । क्षीणेस्खलद्गृविधनोल्पबुद्धिः न्यूनाधिकत्वे फल - { तारतम्यम् ॥ २ ॥ जिस मनुष्यके जन्मकळमें पूर्ण चंद्रमा धनभावेमें बैठाझे वह मनुष्य सुख और पुत्र धन करके सहित नम्रताकरके युक्त श्रेष्ठ होतहैि और जो क्षीणचंदमा धनभाधमें हो तो वह मनुष्य तक धनरहित थोड़ी बुद्धिबळा होताहै और ने चंद्रमा न तो पूर्णबी होय और न ह्नवी होय धूर्ण और हीनके अंतर्गत होय तो उसका फछ कमबती विचारकरके कैह्नः चाहिये ॥ ३ ॥ अथ सहजभावस्थितचंद्रफलम् । हिंस्रः सगर्वः कृपणोल्पबुद्धिर्भवेज्जन बंधुजनाश्रयश्च । दयाभयाभ्यां परिवर्जितश्च द्विजाधिराजे सृती प्रदौ ॥ ३ ॥ निसमनुष्यके इन्मकाछमें तीसरे भावमें चंद्रमा बैठाडोय र सयसँसा करनेवाळा भधसे हीन होताहै। गूड अभिमनी कृपणा अस्प बुद्धि बंधुजनोंका आश्रय करनेवा अथ चतुर्थभावस्थितचंद्रफ । जलाश्रयोत्पन्नधनोपलब्धि कृष्यंगनाचाहन्सेर्यम् } प्रमूनिकालं कुरुते कलावान्पातालसंस्थो भक्तिम्॥ ४ ॥ - करके उत्पन्न तिसुमनुष्यके जन्मकालमें चतुर्थभावने चंद्रमा बैशाहोय वह और देव नके ग्राम करने या खेती और स्त्री तथा सवारी और पुत्र टोंक भझ गई + ५ ॥ अथ पंचमभावस्थचंद्रफलम् ई . जितेंद्रियः सस्यवचः प्रसन्न धनात्मजाव सुयही स्यान्मनुजः सुशीलः प्रसूतिकाले ॥ ९॥
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