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पृष्ठम्:जातकाभरण.pdf/१००

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आयटीकासहित। { & } जिस मनुष्यके जन्मकाछमें मंगळ यांचवें बैज होय तो उसके जितने पुत्र व ॐयं सी सव नाशकं आप्त होते हैं जो केतु देखता होय और जो शुक देखता इष ५ईटे पेंझ हुआ ही पुत्र नाश होता है । १९ ॥ अथ रिपुभावविचारः। वैरित्रातः क्रूरकर्मामयानां चिंता शंका मातुलानां विचारः ॥ हरापारावारपारं प्रयातैरेतत्सर्वं शत्रुभाड़े विचिंत्यम् ॥ १ ॥ छठे भावसे वथा क्या विचार करना चाहिये को कहते हैं दुश्मन और दूरमं, रंग- चिंता और शंका मामाका विचार करना चाहिये ज्योतिषशास्त्रके पार जानेलाटे पंटित विचार करें ॥ १ ॥ दृष्णुितिर्वो खलखेचराणामरातिभावेरिविनाशनं स्यात् । शुभग्रहाणां प्रतिदृष्टितोत्र शबूद्मोप्यामयसंभवः स्यात् ॥ २ X जिस मनुष्यके जन्मकाळमें छठाभाव पापग्रहों करके दृष्टं वा युक्क हेय तो शत्रुओंका तथा रोगोंका नाश होता है और न छठभात्र शुभग्रह करके युक्त वा दृष्ट होय तो अष्ट ऑकी उत्पति रोगोंका प्राप्ति होती है ॥ २ ॥ अथ जायभववचारः । रणाङ्गने चापि वणिक्क्रियाश्च जायाविचारागमनप्रमाणम् । शास्त्रप्रवीणैर्हि विचारणीयं कलत्रभावे किल सर्वमेतत् ॥ १ ॥ अष सप्तमभावसे क्या क्या विचार करना चाहिये संगम, स्त्र, व्यापार यात्रक प्रभाव इन सब बातोंको सातवें भाव ज्योतिषीलेग बियर की ॥ १ ॥ मूतीं कलघस्य नवांशको वा द्विषद्भावाखिलवः शुभानाम् ॥ अनेन योगेन हि मानवानां स्यादङ्गनानामचिरादतिः २ ॥ जिस मनुष्य जन्मकालमें छत्र और संप्रेमभाषमें जो शुभग्रहका भव श द शां था द्रेष्कर् उदय होय तो उख मनुधक शीप्रही सका आभ इत है / ३ =