पृष्ठम्:कादम्बरीकथासारः.pdf/१८८

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२३ सर्गः श्लोकः सग:

१०३३. स्थित्वा मुहूते... ८ ३६ | १०५४स्वामिनी .. १० ८ १०३४. नातानुलिसो ... १० ९० | १०५५. स्विनं श्रमवशात्तस्य १ ४७ १०३५. सातोत्थिता। .. ११ ६८ | १०५६. स्विन्नलिकन् ११ ४४ १०३६. खनभोजन .. १ ४१ | १०५७ . हजे तरलिके... ९ १४ १०३७स्नानभोजन .... ५ ८६ १०५८. हजे तरलिके कर्म ९ ३५ १०३८. लानेम पृथिवीपालः १ ५९ १०५९. हन्त मामियमालोक्य ६ ८१ १०३९. स्निग्धया ... ०५१ | १०६०, हरनेत्रानल .... ७ ६० १०४०. नेह: कमकृतः १० ७४ | १०६१. हरौपषवाद्ये .. ११ २४ १०४१. स्पृष्टा गङ्गा ... १० १७ | १०६२ र्हस्थयातायन.... ५ ३१ १०४२. स्फाटिक ... ६ ५७ १०६३ हृद्याच्च कल्पद्म ११ १४ १०४३. स्फाटिते चत्वरे ३ १०६४. हस्ते १०४४, फुरफ प्रासंहति ११ ६७ गृहीत्वा .. ४ ३७ १०४५. मरार्ता जालमार्गेण १० ८२ १०६५. हंसो हरिप्रभावस्तां ७ ३८ १०४६. सित्वा विचिन्नृप १ ३७ | १०६६ . हा दिवंगत .. ९ ६८ १०४७. स्रष्टुः सकल... ६ ७० | १०६७, हरं हासं .. ६ ६८ १०४८. स्वयमेवागतां... ९ ३९ | १०६८. हारितो मां .... ३ ३३ १०४९. स्वयूथभ्रष्ट .... २. ४३ १ १०६९. हा सरस्वत्यनाथासि ९ ४३. १०५०. स्वयं निपतितैः ७ ८ | १०७०. हिया निवृत्तस्य ७ १०२ १०५१. स्वशबाथै ... २ २० | १०७१. कोष्ठरागाणि. .. ३ ८६ १०५२. स्वस्थोऽपि को १० ११ १०७२. हेमसिंहासन .. १ ९ १०५३ . स्वाधीन यस्य. .. ८ ६१ | १० ७३. हैमे गृहे . ११ १६ । R|TIRUPATIहै