पृष्ठम्:कादम्बरीकथासारः.pdf/१७८

विकिस्रोतः तः
Jump to navigation Jump to search
एतत् पृष्ठम् अपरिष्कृतम् अस्ति


भर्ग: लोक सर्गः श्लोकः _ ५५८. त्वमेकतानः... ५ ९६ | ५८२. दीर्घिका मज्जतां १० १९ ५५९. त्वया विमुत्तरं ८ २७ |५८३. दनैः किमत्र ... ८ ७७ ५६०. त्वया विरहिता ९ ६४ | ५८४. दुर्निमित्तेन .. ६ २९ ५६१. व तात .... ५ ७९ |५८५ , दूरस्थता १० ८६ ५६२. स्वं भर्तृदारिके १० ६३ | ५८६. दूरं मुक्तालतया ८ २३ ५६३. त्वं यासि चेत् ११ ५ ८५ घृते श्लथीकृत्य ११ ६९ ५६४. यामदृष्टा ... ९ . ४७|५८८. दृष्टिरेवाति ... १० ३५ ५६५ . त्वां प्रस्थिते .. १२ ९ ५८९. दृष्टं कुमारं .... ११ ७६ ५६६. दक्षिण मे .... ९. २८ ५९०. दृष्ट्वाप्सु ... ५ १३ ५६७. दक्षिणां मूर्ति.. ६ ६८ |५९१. दृष्ट्वा मां .. ३ ३४ ५६८. दत्तचञ्चुपुटा.... २ ६३ | ५९२ . दृष्टालपन्त .... ५ ९ ६६ ५६९. ददर्श दयितसङ्ग ४ ६२ | ५९३. देव किं बहुना १ ६४ ५७०. दधती सस्यपि ४ ४८ ॥ ५९४. देव त्वया .... १२ ३९ ५७१. दधानं पाणिपन ७ ५९५९५. देवदानव .. ७ १३ ५७२. दध्वनुजेयनिःस्वानाः ६ ११ | ५९६ . देव द्वारि .. १ ११ ५७३. दर्शनमभृति. .. १० ११५५९७. देव प्रयाते .. १२ ५० ५७४. दर्शथित्वेव .... ९ ६० | ५९८. देव विज्ञापयन्ति १ ५८ ५७५ . दापयमनयो. ... ७ ४० | ५९९. देवः प्रमाण .... १ १३ ५७६. दिङ्मुखेषु ... ६ २५ ६००. देवस्येन्द्रायुधो ५ २९ ५७७. दिने दिने .. १२ २६ | ६०१. देवाश्रिदर्शन. . १ १२ ५७८. दिवि चन्द्रकरप्लेषा ९ १२ | ६०२. देवि किं क्रियतामत्र ४ १६ ५७९. दिवि मारुतवेगेन ८ ५२ | ६०३. देवी च मदिरा १० ६९ ५८०. दिव्यं हित्वा .... ७ १५ ६०४ देहप्रभा १ २४ ५८१द्विषां पुरी .... ३ ७५ ६०५. दोर्दण्डबल ... ७ ३५