बृहदारण्यक उपनिषद् 2

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अत्र गम्यताम् : सञ्चरणं, अन्वेषणम्
उपनिषद्


॥बृहदारण्यकोपनिषत्॥


K om.
न' वा' अरे प' त्युः का' माय प' तिः प्रियो' भवति
आत्म' नस् तु' का' माय प' तिः प्रियो' भवति॥
न' वा' अरे जाया' यै का' माय जाया' प्रिया' भवति
आत्म' नस् तु' का' माय जाया' प्रिया' भवति॥
न' वा' अरे पुत्रा' णां का' माय पुत्रा' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय पुत्रा' ः प्रिया' भवन्ति॥
न' वा' अरे वित्त' स्य का' माय वित्त' ं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय वित्त' ं प्रिय' ं भवति॥
न' वा' अरे ब्र' ह्मणः का' माय ब्र' ह्म प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय ब्र' ह्म प्रिय' ं भवति॥
न' वा' अरे क्षत्र' स्य का' माय क्षत्र' ं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय क्षत्र' ं प्रिय' ं भवति॥
न' वा' अरे लोका' नां का' माय लोका' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय लोका' ः प्रिया' भवन्ति॥
न' वा' अरे देवा' नां का' माय देवा' ः प्रिया' भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय देवा' ः प्रिया' भवन्ति॥
न' वा' अरे भूता' नां का' माय भूता' नि प्रिया' णि भवन्ति
आत्म' नस् तु' का' माय भूता' नि प्रिया' णि भवन्ति॥
न' वा' अरे स' र्वस्य का' माय स' र्वं प्रिय' ं भवति
आत्म' नस् तु' का' माय स' र्वं प्रिय' ं भवति॥
आत्मा' वा' अरे द्रष्ट' व्यः श्रोत' व्यो मन्त' व्यो निदिध्यासित' व्यो॥
मै' त्रेयि
आत्म' नो वा' अरे द' र्शनेन श्र' वणेन मत्या' विज्ञा' नेनेद' ँ स' र्वं विदित' म्॥

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ब्र' ह्म त' ं प' रादाद्यो' ऽन्य' त्रात्म' नो ब्र' ह्म वे' द;
क्षत्र' ं त' ं प' रादाद्यो' ऽन्य' त्रात्म' नः क्षत्र' ं वे' द;
लोका' स् त' ं प' रादुर्यो' ऽन्य' त्रात्म' नो लोका' न्वे' द;
देवा' स् त' ं प' रादुर्यो' ऽन्य' त्रात्म' नो देवा' न्वे' द;
भूता' नि त' ं प' रादुर्यो' ऽन्य' त्रात्म' नो भूता' नि वे' द;
स' र्वं त' ं प' रादाद्यो' ऽन्य' त्रात्म' नः स' र्वं वे' देद' ं ब्र' ह्मेद' ं क्षत्र' म्
इमे' लोका' ,
इमे' देवा' ,
इमा' नि भूता' नीद' ँ स' र्वं,
य' दय' मात्मा'॥

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स' य' था दुन्दुभे' र्हन्य' मानस्य न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुयाद्ग्र' हणाय,
दुन्दुभे' स् तु' ग्र' हणेन दुन्दुभ्याघात' स्य वा श' ब्दो गृहीत' ः;

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स' य' था वी' णायै वाद्य' मानायै न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुयाद्ग्र' हणाय,
वी' णायै तु' ग्र' हणेन वीणावाद' स्य वा श' ब्दो ग्र्हीत' ः;

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स' य' था शङ्ख' स्य ध्माय' मानस्य न' बा' ह्याङ्छ' ब्दाङ्छक्नुयाद्ग्र' हणाय,
शङ्ख' स्य तु' ग्र' हणेन शङ्खध्म' स्य वा श' ब्दो गृहीत' ः;

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स' य' थार्द्रैधाग्ने' रभ्या' हितस्य

K abhyAhitAt
पृथग्धूमा' विनिश्च' रन्ति
एव' वा' अरेऽस्य महतो' भूत' स्य नि' श्वसितम्

K niHshvasitam
एत' द्य' दृग्वेदो' यजुर्वेद' ः सामवेदो' ऽथर्वाङ्गिर' स इतिहास' ः पुराण' ं विद्या' उपनिष' दः श्लो' काः सू' त्राण्यनुव्याख्या' नानि व्याख्या' ननि
अस्यै' वै' ता' नि स' र्वाणि नि' श्वसितानि

kniHshvasitAni

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स' य' था स' र्वासामपा' ँ समुद्र' एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ स्पर्शा' नां त्व' गेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां गन्धा' नां ना' सिके एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ र' सानां जिह्वै' कायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ रूपा' णां च' क्षुरेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषँ श' ब्दानाँ श्रो' त्रमेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाँ सङ्कल्पा' नां म' न एकायन' म्

K variato ordineH
एव' ँ स' र्वेषां वे' दानां वा' गेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां क' र्मणाँ ह' स्तावेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषाम' ध्वनां पा' दावेकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषामानन्दा' नामुप' स्थ एकायन' म्
एव' ँ स' र्वेषां विसर्गा' णां पा' युरेकायन' म्
एव' ँ स' र्वासां विद्या' नाँ हृदयमेकायन' म्

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स' य' था सैन्धवखिल्य' उदके' प्रा' स्त उदक' मेवा' नुविली' येत,
ना' हास्योद्ग्र' हणायैव'

K na hAsyodgrahaNAyaiva
स्याद्
य' तो-यतस् त्वा' द' दीत लव' णमेवै' व' ं वा' अर इद' ं मह' द्भूत' मनन्त' मपार' ं विज्ञानघन' एवै' ते' भ्यो भूते' भ्यः समुत्था' य,
ता' न्य् एवा' नुवि' नश्यति;
न' प्रे' त्य संज्ञा' स्ती' त्यरे ब्रवीमी' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यः॥

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सा' होवाच मै' त्रेयि
अ' त्रैव' मा भ' गवानमूमुहद्
न' प्रे' त्य संज्ञा' स्ती' ति॥

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स' होवाच या' ज्ञवल्क्यो

K om.
न' वा' अरेऽह' ं मो' हं ब्रवीमि
अल' ं वा' अर इद' ं विज्ञा' नाय॥

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य' त्र हि' द्वैत' मिव भ' वति,

K variato ordineH
त' दि' तर इ' तरं जिघ्रति,
त' दि' तर इ' तरं पश्यति
त' दि' तर इ' तरँ शृणोति,
त' दि' तर इ' तरमभि' वदति,
त' दि' तर इ' तरं मनुते,
त' दि' तर इ' तरं वि' जानाति॥

pM16/k14
य' त्र त्व' स्य स' र्वमात्मै' वा' भूत्

kvariato ordineH
त' त्के' न क' ं पश्येत्
त' त्के' न क' ं जिघ्रेत्
त' त्के' न क' ँ शृणुयात्
त' त्के' न क' मभि' वदेत्
त' त्के' न क' ं मन्वीत,
त' त्के' न क' ं वि' जानीयाद्॥
ये' नेद' ँ स' र्वं विजाना' ति,
त' ं के' न वि' जानीयाद्
विज्ञाता' रमरे के' न वि' जानीयादि' ति॥

ch5

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इय' ं पृथिवी' स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्यै' पृथिव्यै' स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्या' ं पृथिव्या' ं तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' स् चाय' मध्यात्म' ँ शारीर' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्म,
इद' ँ स' र्वम्॥

pMk2
इमा' आ' पः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
आसा' मपा' ँ स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मास्व' प्सु' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ रैतस' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्म,
इद' ँ स' र्वम्॥

pMk3
अय' मग्नि' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्याग्ने' ः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्नग्नौ' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं वाङ्म' यस् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्म,
इद' ँ स' र्वम्॥

pM4/k10
अय' माकाश' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्याकाश' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्नाकाशे' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ हृद्य् आकाश' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pM5/k4
अय' ं वायु' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य वायो' ः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्वायौ' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं प्राण' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ं अमृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pM6/k5
अय' मादित्य' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्यादित्य' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्नादित्ये' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं चाक्षुष' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pMk7
अय' ं चन्द्र' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य चन्द्र' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्चन्द्रे' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं मानस' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pM8/k6
इमा' दि' शः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
आसा' ं दिशा' ँ स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मासु' दिक्षु' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ श्रौत्र' ः प्रातिश्रुत्क' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pM9/k8
इय' ं विद्यु' त्स' र्वेषां भूता' नं म' धु
अस्यै' विद्यु' तः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्या' ं विद्यु' ति तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं तैजस' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pM10/k9
अय' ँ स्तनयित्नु' ः स' र्वेषां भुता' नां म' धु
अस्य स्तनयित्नो' ः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्त्स्तनयित्नौ' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ शाब्द' ः सौवर' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pMk11
अय' ं धर्म' ः स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य धर्म' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्धर्मे' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं धार्म' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pMk12
इद' ँ सत्य' ँ स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य सत्य' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्त्सत्ये' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ँ सात्य' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pMk13
इद' ं मानुष' ँ स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्य मानुष' स्य स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्मानुषे' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मध्यात्म' ं मानुष' स् तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pMk14
अय' मात्मा' स' र्वेषां भूता' नां म' धु
अस्यात्म' नः स' र्वाणि भूता' नि म' धु;
य' श्चाय' मस्मि' न्नात्म' नि तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
य' श्चाय' मात्मा' तेजोम' योऽमृतम' यः पु' रुषो,
अय' मेव' स' यो' ऽय' मात्मे' द' ममृतम्
इद' ं ब्र' ह्मेद' ँ स' र्वम्॥

pMk15
स' वा' अय' मात्मा' स' र्वेषां अ' धिपतिः,
स' र्वेषां भूता' नाँ रा' जा॥
त' द्य' था रथनाभौ' च रथनेमौ' चा' राः स' र्वे स' मर्पिता,
एव' मेवा' स्मि' न्नात्म' नि स' र्वाणि भूता' नि स' र्वे देवा' ः स' र्वे लोका' ः स' र्वे प्राणा' ः स' र्व एत' आत्मा' नः स' मर्पिताः॥

pMk16
इद' ं वै' त' न्म' धु डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽश्वि' भ्यामुवाच॥
त' देत' दृषिः प' श्यन्नवोचत्

lv 1.116.12:
त' द्वां,
नरा,
सन' ये द' ँस उग्र' म्
आवि' ष् कृणोमि,
तन्यतु' र्न' वृष्टि' ं,
डध्य' ङ् ह य' न्म' ध्व् अथर्वणो' वाम्
अ' श्वस्य शीर्ष्णा' प्र' य' दीमुवा' चे' ति॥

pMk17
इद' ं वै' त' न्म' धु डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽश्वि' भ्यामुवाच॥
त' देत' दृषिः प' श्यन्नवोचत्

lv 1.117.22:
अथर्वणा' याश्विना डधीचे' ऽश्व्यँ शि' रः प्र' त्यैरयतं;
स' वां म' धु प्र' वोचदृताय' न्
त्वाष्ट्र' ं य' द्
दस्राउ
अपिकक्ष्य' ं वामि' ति॥

pMk18
इद' ं वै' त' न्म' धु डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽश्वि' भ्यामुवाच॥
त' देत' दृषिः प' श्यन्नवोचत्
पु' रश्चक्रे द्विप' दः,
पु' रश्चक्रे च' तुष्पदः;
पु' रः स' ,
पक्षी' भुत्वा' ,
पु' रः पु' रुष आ' विशदि' ति॥
स' वा' अय' ं पु' रुषः स' र्वासु पूर्षु' पुरिशयो' ;
नै' नेन कि' ं चना' नावृतं,
नै' नेन कि' ं चना' सम्वृतम्॥

pMk19
इद' ं वै' त' न्म' धु डध्य' ङ्ङ् अथर्वणो' ऽश्वि' भ्यामुवाच॥
त' देत' दृषिः प' श्यन्नवोचत्

lv 6.47.18:
रूप' ँ-रूपं प्र' तिरूपो बभूव,
त' दस्य रूप' ं प्रतिच' क्षणाये' -
-न्द्रो माया' भिः पुरुरू' प ईयते,
युक्ता' ह्य' स्य ह' रयः शता' द' शे' ति॥
अय' ं वै' ह' रयो,
अय' ं वै' दश च सह' स्रणि बहू' नि चानन्ता' नि च॥
त' देत' द्ब्र' ह्मापूर्व' मनपर' मनन्तर' मबाह्य' म्
अय' मात्मा' ब्र' ह्म स' र्वानुभूः॥
इ' त्यनुशा' सनम्॥
[पनुस्तुब्]

pM20

pro m5,20-22 schribitkrishna 6; vide infra
अ' थ वँश' ः॥
त' दिद' ं वय' ँ
हौ' र्पणाय्याच्,
छौ' र्पणय्यो गौ' तमाद्
गौ' तमो व' त्स्याद्
व' त्स्यो वा' त्स्याच्च पाराशर्या' च्च,
पा' राशर्यः षा' ंक्त्याच्च भा' रद्वाजाच्च,
भा' रद्वाज औदावहे' श्च हा' ण्डिल्याच्च,
हा' ण्डिल्यो वै' जवापाच्च गौतमा' च्च,
गौ' तमो वै' जवापायनाच्च वैष्टपुरेया' च्च,
वै' ष्टपुरेयः हा' ण्डिल्याच्च ऱौहिणायना' च्च,
ऱौ' हिणायनः हौ' नकाच्चात्रेया' च्च ऱैभ्या' च्च,
ऱै' भ्यः पौ' तिमाष्यायणाच्च कौण्डिन्यायना' च्च,
कौ' ण्डिन्यायनः कौ' ण्डिन्यात्
कौ' ण्डिन्यः कौ' ण्डिन्यात्
कौ' ण्डिन्यः कौण्डिन्या' च्चाग्निवेश्या' च्च,

pM21

pro m5,20-22 schribitkrishna 6; vide infra
अग्निवेश्य' ः षौ' तवात्
षौ' तवः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यः जा' तुकर्ण्यात्
जा' तुकर्ण्यो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो भारद्वाजा' च्चासुरायणा' च्च गौतमा' च्च,
गौ' तमो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो वैजवापायना' च्,
वै' जवापायनः कशिकायने' ः,
कशिकायनि' र्घृतकौशिका' द्
घृतकौशिक' ः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यः पा' राशर्यात्
पा' राशर्यः जा' तुकर्ण्यात्
जा' तुकर्ण्यो भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो भारद्वाजा' च्चासुरायणा' च्यस्का' च्च,
असुरायण' स् ट्रै' वणेः
ट्रै' वणिराउ' पजन्धनेः
आउ' पजन्धनिःअसुरेः
असुरिर्भा' रद्वाजाद्
भा' रद्वाजो अत्रेया' त्

pM22

pro m5,20-22 schribitkrishna 6; vide infra
अत्रेयो' मा' ण्टेः,
मा' ण्टिर्गौ' तमाद्
गौ' तमो गौ' तमाद्
गौ' तमो वा' त्स्याद्
वा' त्स्यः हा' ण्डिल्याच्,
छा' ण्डिल्यः कै' शोर्यात्का' प्यात्
कै' शोर्यः का' प्यः कुमारहरिता' त्
कुमारहरितो' गालवा' द्
गालवो' विदर्भीकौण्डिन्या' द्
विदर्भीकौण्डिन्यो' बा' भवाद्वत्सनपा' द्
बा' भवः पथ' ः षौ' भरात्
प' न्थाः षौ' भरोऽया' स्यादङ्गिरसा' द्
आया' स्यो अङ्गिरस' ऽभुतेस् ट्वा' ष्ट्राद्
अभुतिः ट्वा' ष्ट्रो विश्व' रूपाद्ट्वा' ष्ट्राद्
विश्व' रूपस् ट्वा' ष्ट्रोऽश्वि' भ्याम्
आश्वि' नौ डधि' च अथर्वना' द्
डध्य' ङ्ङ् अथर्वनो' ऽथर्वनो डै' वाद्
अथर्वा डै' व मृत्यो' ः प्राद्ध' ँसनान्
मृत्यु' ः प्राद्ध' ँसनः ष' नगात्
ष' नगः परेष्टि' णः
परेष्टी' ब्र' ह्मनो
ब्र' ह्म स्व' यंभु,
ब्र' ह्मणे न' मः॥

chk6

schribitkrishna pro m5,20-22; vide supra

pk1
अथ वँशः
पशुतिमाष्यो गौपवनाद्
गौपवनः पशुतिमाष्यात्
पशुतिमाष्यो गौपवनाद्
गौपवनः कौशिकात्
कौशिकः कौण्डिन्यात्
कौण्डिन्यः हाण्डिल्यात्
हाण्डिल्यः कौशिकाच्च गौतमाच्च,
गौतमो

pk2
अग्निवेश्याद्
अग्निवेश्यः हाण्डिल्याच्चानभिम्लाताच्च,
अनभिम्लात अनभिम्लाताद्
अनभिम्लात अनभिम्लाताद्
अनभिम्लातो गौतमाद्
गौतमः षैतवप्राचीनयोग्याभ्याँ,
षैतवप्राचीनयोग्यौ पाराशर्यात्
पाराशर्यो भारद्वाजाद्
भारद्वाजो भारद्वाजाच्च गौतमाच्च,
गौतमो भारद्वाजाद्
भारद्वाजः पाराशर्यात्
पाराशर्यो वैजवापायनाद्
वैजवापायनः कौशिकायनेः,
कौशिकायनिर्

pk3
घृतकौशिकाद्
घृतकौशिकः प्राशर्यायणात्
पारशर्यायणः पाराशर्यात्
पाराशर्यो जातूकर्ण्यात्
जातूकर्ण्य असुरायणाच्च यास्काच्च,
असुरायणस् ट्रैवणेः,
ट्रैवणिरौपजन्धनेः,
औपजन्धनिरसुरेः,
असुरिर्भारद्वाजाद्
भारद्वाज अत्रेयाद्
अत्रेयो माण्टेः,
माण्टिर्गौतमाद्
गौतमो वात्स्याद्
वात्स्यः हाण्डिल्याच्,
छाण्डिल्यः कैशोर्यात्काप्यात्
कैशोर्यः काप्यः कुमारहारितात्
कुमारहारितो गालवाद्
गालवो विदर्भीकौण्डिन्याद्
विदर्भीकौण्डिन्यो वत्सनपातो बाभ्रवाद्
वत्सनपाद्बाभ्रवः पथः षौभरात्
पन्थाः षौभरोऽयास्यादङ्गिरसाद्
आयास्य अङ्गिरस अभूतेस् ट्वाष्ट्राद्
अभूतिस् ट्वाष्ट्रो विश्वरूपात्ट्वाष्ट्राद्
विश्वरूपस् ट्वाष्ट्रोऽव्शि' भ्याम्
आश्वि' नौ डधीच अथर्वणाद्
डध्यङ्ङ् अथर्वणोऽथर्वणो डैवाद्
आथर्वा डैवो मृत्योः प्राध्वँसनान्
मृत्यु' ः प्राध्वँसनः प्रध्वँसनात्
प्रध्वँसन एकर्षेः
एकर्षिर्विप्रचित्तेः
विप्रचित्तिर्व्यष्टेः
व्यष्टिः षनारोः,
षनारुः षनातनात्
षनातनः षनगात्
षनगः परमेष्ठिनः,
परमेष्ठी ब्रह्मणो;
ब्रह्म स्वयंभु,
ब्रह्मणे नमः॥
[प्नोर्मल्]

ch3 = hbM 14.6. = hbk16.6.

ch1

pMk1
जनको' ह वै' देहो बहुदक्षिणे' न यज्ञे' नेजे॥
त' त्र ह कुरुपङ्चाला' नां ब्राह्मणा' अभिस' मेता बभूवुः॥
त' स्य ह जनक' स्य वै' देहस्य विजिज्ञा' सा

Ai.gH II 2, paH 142a[Tgrx16]AH +vijiGYAsA\`
बभूवः
क' ः स्विदेषा' ं ब्राह्मणा' नामनूचान' तम इ' ति॥

pM2/k1
स' ह ग' वाँ सह' स्रम' वरुरोध;
द' श-दश पा' दा ए' कैकस्याः शृङ्गयोरा' बद्धा बभूवुः॥

pM2/k2
ता' न्होवाचः
ब्रा' ह्मणा भगवन्तो,
यो' वो ब्र' ह्मिष्ठः,
स' एता' गा' उ' दजतामि' ति॥
ते' ह ब्राह्मणा' न' दधृषुः॥

pM3/k2
अ' थ ह या' ज्ञवल्क्यः स्व' मेव' ब्रह्मचारि' णमुवाचैता' ः,
सौम्यो' दज,
षामश्रवा३ इ' ति॥
ता' होदा' चकार॥
ते' ह ब्राह्मणा' श्चुक्रुधुः
कथ' ं नु' नो ब्र' ह्मिष्ठो ब्रुवीते' ति॥

pM4/k2
अ' थ ह जनक' स्य वै' देहस्य हो' ताश्वलो' बभूव॥
स' हैनं पप्रच्छः
त्व' ं नु' ख' लु नो,
याज्ञवल्क्य,
ब्र' ह्मिष्ठोऽसी३ इ' ति॥
स' होवाचः
न' मो वय' ं ब्र' ह्मिष्ठाय कुर्मो;
गो' कामा एव' वय' ँ स्म इ' ति॥
त' ँ ह त' त एव' प्र' ष्टुं दध्रे हो' ताश्वल' ः

pM5/k3
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वं मृत्यु' नाप्त' ँ,
स' र्वं मृत्यु' नाभि' पन्नं,
के' न य' जमानो मृत्यो' रा' प्तिम' तिमुच्यत इ' ति॥
हो' त्रर्त्वि' जाग्नि' ना वाचा' ;
वा' ग्वै' यज्ञ' स्य हो' ता॥
त' द्ये' य' ं वा' क्सो' ऽय' मग्नि' ः स' हो' ता सा' मु' क्तिः सा' तिमुक्तिः॥

pM6/k4
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वमहोरात्रा' भ्यामाप्त' ँ,
स' र्वमहोरात्रा' भ्यामभि' पन्नं,
के' न य' जमानोऽहोरात्र' योरा' प्तिम' तिमुच्यत इ' ति॥
अध्वर्यु' णर्त्वि' जा च' क्षुषादित्ये' न;
च' क्षुर्वै' यज्ञ' स्याध्वर्यु' ः॥
त' द्य' दिद' ं च' क्षुः,
सो' ऽसा' वादित्य' ः;
सो' ऽध्वर्यु' ः सा' मु' क्तिः सा' तिमुक्तिः॥

pM7/k5
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वं पूर्वपक्षापरपक्षा' भ्यामाप्त' ँ,
स' र्वं पूर्वपक्षापरपक्षा' भ्यामभि' पन्नं,
के' न य' जमानः पूर्वपक्षापरपक्ष' योरा' प्तिम' तिमुच्यत इ' ति॥
ब्रह्म' णर्त्वि' जा म' नसा चन्द्रे' ण;
म' नो वै' यज्ञ' स्य ब्रह्मा'॥
त' द्य' दिद' ं म' नः,
सो' ऽसौ' चन्द्र' ः स' ब्रह्मा' सा' मु' क्तिः सा' तिमुक्तिः॥

pM8/k6
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' मन्त' रिक्षमनारम्बण' मिव;
के' नाक्रमे' ण य' जमानः स्वर्ग' ं लोक' मा' क्रमत इ' ति॥
उद्गात्र' र्त्वि' जा वयु' ना प्राणे' न;
प्राणो' वै' यज्ञ' स्योद्गाता'॥
त' द्यो' ऽय' ं प्राण' ः स' वायु' ः स' उद्गाता' सा' मु' क्तिः सा' तिमुक्तिः॥
इ' त्य' तिमोक्षा,
अ' थ संप' दः॥

pM9/k7
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' तिभिरय' मद्य' र्ग्भि' र्हो' तास्मि' न्यज्ञे' करिष्यती' ति॥
तिसृभिरि' ति॥
कतमा' स् ता' स् ति' स्र इ' ति॥
पुरोनुवाक्या' च याज्या' च श' स्यैव' तृती' या॥
कि' ं ता' भिर्जयती' ति॥
पृथिवीलोक' मेव' पुरोनुवाक्य' या ज' यति
अन्तरिक्षलोक' ं याज्य' या,
द्यौर्लोक' ँ श' स्यया

pM10/k8
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' त्यय' मद्या' ध्वर्यु' रस्मि' न्यज्ञ' आ' हुतीर्होष्यती' ति॥
तिस्र' इ' ति॥
कतमा' स् ता' स् ति' स्र इ' ति॥
या' हुता' उज्ज्व' लन्ति,
या' हुता' अतिने' दन्ति,
या' हुता' अधिशे' रते॥
कि' ं ता' भिर्जयती' ति॥
या' हुता' उज्ज्व' लन्ति,
देवलोक' मेव' ता' भिर्जयतिः
दी' प्यत इव हि' देवलोको'॥
या' हुता' अतिने' दन्ति,
मनुष्यलोक' म्

K pitR\^ilokam
एव' ता' भिर्जयति
अ' तीव हि' मनुष्यलोको'

K pitR\^iloko
या' हुता' अधिशे' रते,
पितृलोक' म्

K manushhyalokam
एव' ता' भिर्जयति
अध' इव हि' पितृलोक' ः

K manushhyaloka\`H

pM11/k9
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' तिभिरय' मद्य' ब्रह्मा' यज्ञ' ं दक्षिणतो' देव' ताभिर्गोपायिष्य' ती' त्य्

K gopAyatIty
ए' कये' ति॥
कतमा' सै' के' ति॥
म' न एवे' ति॥
अनन्त' ं वै' म' नो,
अनन्ता' वि' श्वे देवा'॥
अनन्त' मेव' स' ते' न लोक' ं जयति॥

pM12/k10
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' त्यय' मद्यो' द्गाता' स्मि' न्यज्ञे' स्तोत्रि' याः स्तोष्यती' ति॥
तिस्र' इ' ति॥
कतमा' स् ता' स् ति' स्र इ' ति॥
पुरोनुवाक्या' च याज्या' च श' स्यैव' तृती' याधिदेवत' म्
अ' थाध्यत्म' ं

K om. adhidevatam॥.
कतमा' स् ता' या' अध्यात्म' मि' ति॥
प्राण' एव' पुरोनुवाक्या' पानो' याज्या' ,
व्यान' ः श' स्या॥
कि' ं ता' भिर्जयती' ति॥
य' त्कि' ङ्चेद' ं प्राणभृदि' ति

kpro ya\`t॥.

schribitpR\^ithivIlokameva puronuvAkyayA jayati
त' तो ह हो' ताश्वल' उ' परराम॥

ch2

pMk1
अ' थ हैनं जारत्कारव' आ' र्तभागः पप्रच्छ॥
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
क' ति ग्र' हाः,
क' त्यतिग्रहा' इ' ति॥
अष्टौ' ग्र' हा,
अष्टा' वतिग्रहा' इ' ति॥
ये' ते' ऽष्टौ' ग्र' हा,
अष्टा' वतिग्रहा' ः,
कतमे' त' इ' ति॥

pMk2
प्राणो' वै' ग्र' हः॥
सो' ऽपाने' नातिग्रहे' ण

K sa gandhenAtigraheNa
गृहीतो'॥
अपाने' न

K prANena
हि' गन्धा' ङ्जि' घ्रति॥

pM3/k4
जिह्वा' वै' ग्र' हः॥
स' र' सेनातिग्रहे' ण गृहीतो' ;
जिह्व' या हि' र' सान्विजाना' ति॥

pM4/k3
वा' ग्वै' ग्र' हः॥
स' ना' म्नातिग्रहे' ण गृहीतो' ;
वाचा' हि' ना' मान्यभिव' दति॥

pMk5
च' क्षुर्वै' ग्र' हः॥
स' रूपे' णातिग्रहे' ण गृहीत' श्;
च' क्षुषा हि' रूपा' णि प' श्यति॥

pMk6
श्रो' त्रं वै' ग्र' हः॥
स' श' ब्देनातिग्रहे' ण गृहीत' ः;
श्रो' त्रेण हि' श' ब्दाङ्छृणो' ति॥

pMk7
म' नो वै' ग्र' हः॥
स' का' मेनातिग्रहे' ण गृहीतो' ;
म' नसा हि' का' मान्काम' यते॥

pMk8
ह' स्तौ वै' ग्र' हः॥
स' क' र्मणातिग्रहे' ण गृहीतो' ;
ह' स्ताभ्याँ हि' क' र्म करो' ति॥

pMk9
त्व' ग्वै' ग्र' हः॥
स' स्प' र्शेनातिग्रहे' ण गृहीत' स्;
त्वचा' हि' स्प' र्शान्वेद' यत॥
इ' त्यष्टौ' ग्र' हा,
अष्टा' वतिग्रहा' ः॥

pMk10
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वं मृत्यो' र' न्नं,
का' स्वित्सा' देव' ता,
य' स्या मृत्यु' र' न्नमि' ति॥
अग्नि' र्वै' मृत्यु' ः,
सो' ऽपा' म' न्नम्
अ' प पुनर्मृत्यु' ं जयति॥

pM11/k12
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' त्राय' ं पु' रुषो म्रिय' ते,
कि' मेनं न' जहाती' ति॥
ना' मे' ति
अनन्त' ं वै' ना' मानन्ता' वि' श्वे देवा' ;
अनन्त' मेव' स' ते' न लोक' ं जयति॥

pM12/k11
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' त्राय' ं पु' रुषो म्रिय' त,
उ' दस्मा' त्प्राणा' ः क्रामन्ति
आ' हो ने' ति॥
ने' ति होवाच या' ज्ञवल्क्यो' ,
अत्रैव' सम' वनीयन्ते,
स' उ' च्छ्वयति
आ' ध्मायति
आ' ध्मातो मृत' ः शेते॥

pMk13
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' त्रास्य पु' रुषस्य मृत' स्याग्नि' ं वा' गप्ये' ति,
वा' तं प्राण' श्,
च' क्षुरादित्य' ं,
म' नश्चन्द्र' ं,
दि' शः श्रो' त्रं,
पृथिवी' ँ श' रीरम्
आकाश' मात्मौ' षधीर्लो' मानि,
व' नस्प' तीन्के' शा,
अप्सु' लो' हितं च रे' तश्च निधी' यते,
क्वा' य' ं तदा' पु' रुषो भवती' ति॥
आ' हर,
सौम्य,
ह' स्तम्॥

pM14/k13
आ' र्तभागे' ति होवाचावा' म्

K om. iti hovAcha
एवै' त' द्

kevaitasya
वेदिष्या' वो;
न' नावेत' त्सजन' इ' ति॥
तौ' होत्क्र' म्य मन्त्रया' ं चक्रतुस्

K chakrAte
तौ' ह य' दूच' तुः,
क' र्म हैव' त' दूचतुः
अ' थ ह य' त्प्रशँस' तुः,
क' र्म हैव' त' त्प्र' शँसतुः
पु' ण्यो वै' पु' ण्येन क' र्मणा भवति,
पा' पः पा' पेने' ति॥
त' तो ह जारत्कारव' आ' र्तभाग उ' परराम॥

ch3

pMk1
अ' थ हैनं भुज्यु' र्ला' ह्यायनिः पप्रच्छ॥
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
मद्रे' षु च' रकाः प' र्यव्रजाम;
ते' पत' ङ्चलस्य का' प्यस्य गृहा' नै' म॥
त' स्यासीद्दुहिता' गन्धर्व' गृहीता;
त' मपृच्छामः
को' ऽसी' ति॥
सो' ऽब्रवीत्
षुधन्वा' ङ्गिरस' इ' ति॥
त' ं यदा' लोका' नाम' न्तान' पृच्छामा' थैत' द्

K athainam
अब्रूमः
क्व' पारिक्षिता' अभवन्नि' ति॥
क्व' पारिक्षिता' अभवन्नि' ति॥

kabhavant.
त' त्

K sa
त्वा पृच्छामि,
याज्ञवल्क्यः
क्व' पारिक्षिता' अभवन्नि' ति॥

pMk2
स' होवाचोवा' च वै' स' त' द्
अगच्छन्वै' ते' त' त्र,
य' त्राश्वमेधयाजि' नो ग' च्छन्ती' ति॥
क्व' न्व' श्वमेधयाजि' नो गच्छन्ती' ति॥
द्वा' त्रिँशत वै' देवरथाह्न्या' न्यय' ं लोक' स्;
त' ँ समन्त' ं लोक' ं द्विस्ता' वत्पृथिवी'

K samantaM pR\^ithivI dvistAvat
प' र्येति;
ता' ँ

K tA.N samantaM
पृथिवी' ं द्विस्ता' वत्समुद्र' ः प' र्येति॥
त' द्या' वती क्षुर' स्य धा' रा,
या' वद्वा म' क्षिकायाः प' त्त्रं,
ता' वान' न्तरेणाकाश' ः॥
ता' न्९न्द्रः सुपर्णो' भूत्वा' वाय' वे प्रा' यच्छत्;
ता' न्वायु' रात्म' नि धित्वा' त' त्रागमयद्य' त्र परिक्षिता'

K ashvamedhayAjino
अ' भवन्नि' ति॥
एव' मिव वै' स' वायु' मेव' प्र' शशँस;
त' स्माद्वायु' रेव' व्य' ष्टिः
वायु' ः स' मष्टिः॥
अ' प पुनर्मृत्यु' ं जयति,
स' र्वमा' युरेति

K om. sarvamAyureti
य' एव' ं वे' द॥
त' तो ह भुज्यु' र्ला' ह्यायनिरु' परराम॥

chM4/k5

pMk1
अ' थ हैनं कहो' डः

K kaholaH
कौ' षीतकेयः पप्रच्छः
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' द्

K add. eva
साक्षा' द' परोक्षाद्ब्र' ह्म य' आत्मा' सर्वान्तर' ः
त' ं मे व्या' चक्ष्वे' ति॥
एष' त आत्मा' सर्वान्तर' ः॥
कतमो' ,
याज्ञवल्क्य,
सर्वान्तरो'॥
यो' ऽशनाया' पिपासे' शो' कं मो' हं जरा' ं मृत्यु' मत्ये' ति॥
एत' ं वै' त' मात्मा' नं विदित्वा' ,
ब्राह्मणा' ः पुत्रैषणा' याश्च वित्तैषणा' याश्च लोकैषणा' याश्च व्युत्था' या' थ भिक्षाच' र्यं चरन्ति॥
या' ह्य् ए' व' पुत्रैषणा' सा' वित्तैषणा' ,
या' वित्तैषणा' सा' लोकैषणो' भे' ह्य् ए' ते' ए' षणे एव' भ' वतः॥
त' स्माद्पण्डित' ः

K brAmaNaH
पा' ण्डित्यं निर्वि' द्य,
बा' ल्येन तिष्ठा' सेद्;
बा' ल्यं च पा' ण्डित्यं च निर्वि' द्या' थ मुनि' ः
अमौन' ं च मौन' ं च निर्वि' द्या' थ ब्राह्मण' ः॥
स' ब्राह्मण' ः के' न स्याद्॥
ये' न स्या' त्
ते' नेदृश एव' भवति,
य' एव' ं वे' द

K evAto.anyadArtaM
त' तो ह कहो' डः

K kaholaH
कौ' षीतकेय उ' परराम॥

chM5/k4

pMk1
अ' थ हैनमूषस्त' श्चा' क्रायणः पप्रच्छ॥
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' त्साक्षा' द' परोक्षाद्ब्र' ह्म य' आत्मा' सर्वान्तर' ः
त' ं मे व्या' चक्ष्वे' ति॥
एष' त आत्मा' सर्वान्तर' ः॥
कतमो' ,
याज्ञवल्क्य,
सर्वान्तरो'॥
य' ः प्राणे' न प्रा' णिति,
स' त आत्मा' सर्वान्तरो' ;
यो' ऽपाने' नापा' निति,
स' त आत्मा' सर्वान्तरो' ;
यो' व्याने' न व्य' निति,
स' त आत्मा' सर्वान्तरो' ;
य' उदाने' नोद' निति,
स' त आत्मा' सर्वान्तरो'॥
य' ः समाने' न सम' निति,
स' त आत्मा' सर्वन्तर' ।

K om. yaH॥.
एष' त आत्मा' सर्वान्तर' ः॥

pM1/k2
स' होवाचोषस्त' श्चा' क्रायणोः
य' था वै' ब्रूया' दसौ' गौ' ः
असा' व' श्व इ' ति
एव' मेवै' त' द्व्य' पदिष्टं भवति॥
य' देव' साक्षा' द' परोक्षाद्ब्र' ह्म य' आत्मा' सर्वान्तर' ः
त' ं मे व्या' चक्ष्वे' ति॥
एष' त आत्मा' सर्वान्तर' ः॥
कतमो' ,
याज्ञवल्क्य,
सर्वान्तरो'॥
न' दृष्टेर्द्रष्टा' रं पश्येः
न' श्रु' तेः श्रोता' रँ शृणुया;
न' मते' र्मन्ता' रं मन्वीथा,
न' वि' ज्ञातेर्विज्ञाता' रं वि' जानीया॥
एष' त आत्मा' सर्वान्तरो'॥
अतोऽन्य' दा' र्तं॥
त' तो होषस्त' श्चा' क्रायण उ' परराम॥

ch6

pMk1
अ' थ हैनं गा' र्गी वाचक्न' वी पप्रच्छः
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
य' दिद' ँ स' र्वमप्स्वो' तं च प्रो' तं च,
क' स्मिन्नु'

K nu khalv
आ' प ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
वायौ' ,
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु'

K nu khalu
वायु' रो' तश्च प्रो' तश्चे' ति॥
आकाश' एव'

K antarikshalokeshhu
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्न्वा' काश'

K nu khalvantarikshalokA\`
ओ' तश्च प्रो' तश्चे' ति॥
अन्तरिक्षलोके' षु

K gandharvalokeshhu
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' ल्वन्तरिक्षलोका'

K gandharvalokA
ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
द्यौर्लोके' षु,
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' लु द्यौर्लोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' त्य्

K om. dyaurlokeshhu॥.
अदित्यलोके' षु,
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' ल्वादित्यलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
चन्द्रलोके' षु,
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' लु चन्द्रलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
नक्षत्रलोके' षु,
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' लु नक्षत्रलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
देवलोके' षु,
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' लु देवलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
गन्धर्वलोके' षु

K indralokeshhu
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' ल्व् गन्धर्वलोका'

K indralokA
ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
प्रजापतिलोके' षु,
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' लु प्रजापतिलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
ब्रह्मलोके' षु,
गार्गी' ति॥
क' स्मिन्नु' ख' लु ब्रह्मलोका' ओ' ताश्च प्रो' ताश्चे' ति॥
स' होवाचः
गा' र्गि,
मा' तिप्राक्षीः
मा' ते मूर्धा' व्य' पप्तद्

K vipaptad
अनतिप्रश्न्या' ं वै' देव' ताम' तिपृच्छसि॥
गा' र्गि,
मा' तिप्राक्षीरि' ति॥
त' तो ह गा' र्गी वाचक्न' व्य् उ' परराम॥

chM7

K ex parte aliteH vide infra

pMk1
अ' थैनमूद्दा' लक आ' रुणिः पप्रच्छः
या' ज्ञवल्क्ये' ति होवाच,
मद्रे' ष्ववसाम पतङ्चल' स्य का' प्यस्य गृहे' षु,
यज्ञ' मधीयाना' ः॥
त' स्यासीद्भार्या' गन्धर्व' गृहीता॥
त' मपृच्छामः
को' ऽसी' ति॥
सो' ऽब्रवीत्
कब' न्ध अथर्वण' इ' ति॥

pM2/k1
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ं का' प्यं याज्ञिका' ँश्चः
वे' त्थ नु' त्व' ं,
काप्य,
त' त्सू' त्रं य' स्मिन्नय' ं च लोक' ः प' रश्च लोक' ः स' र्वाणि च भूता' नि स' ंदृब्धानि भवन्ती' ति॥
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ः का' प्योः
ना' ह' ं त' द्
भगवन्
वेदे' ति॥

pM3/k1
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ं का' प्यं याज्ञिका' ँश्चः
वे' त्थ नु' त्व' ं,
काप्य,
त' मन्तर्यामि' णं,
य' इम' ं च लोक' ं प' रं च लोक' ँ स' र्वाणि च भूता' न्य' न्तरो यम' यती' ति॥
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ः का' प्योः
ना' ह' ं त' ं,
भगवन्
वेदे' ति॥

pM4/k1
सो' ऽब्रवीत्पतङ्चल' ं का' प्यं याज्ञिका' ँश्चः
यो' वै' त' त्
काप्य,
सू' त्रं विद्या' त्त' ं चान्तर्यामि' णँ,
स' ब्रह्मवि' त्
स' लोकवि' त्
स' देववि' त्
स' वेदवि' त्
स' यज्ञवि' त्

K om.
स' भूतवि' त्
स' आत्मवि' त्
स' सर्ववि' दि' ति ते' भ्योऽब्रवीत्॥
त' दह' ं वेद॥
त' च्चे' त्त्व' ं,
याज्ञवल्क्य,
सू' त्रम' विद्वाँस् त' ं चान्तर्यामि' णं ब्रह्मगवी' रुद' जसे,
मूर्धा' ते वि' पतिष्यती' ति॥

pM5/k1
वे' द वा' अह' ं,
गौतम,
त' त्सू' त्रं त' ं चान्तर्यामि' णमि' ति॥
यो' वा' इद' ं क' श्च ब्रूया' द्
वे' द वेदे' ति॥
य' था वे' त्थ,
त' था ब्रूही' ति॥

pM6/k2

K sa hovachaH
वायु' र्वै' ,
गौतम,
त' त्सू' त्रं;
वायु' ना वै' ,
गौतम,
सू' त्रेणाय' ं च लोक' ः प' रश्च लोक' ः स' र्वाणि च भूता' नि स' ंदृब्धानि भवन्ति॥
त' स्माद्वै' ,
गौतम,
पु' रुषं प्रे' तमाहुः
व्य' स्रँसिषतास्या' ङ्गानी' ति;
वायु' ना हि' ,
गौतम,
सू' त्रेण स' म्दृब्धानि भवन्ती' ति॥
एव' मेवै' त' द्

K om. eva
याज्ञवल्क्यान्तर्यामि' णं ब्रूही' ति॥

pM7/k3
य' ः पृथिव्या' ं ति' ष्ठन्पृथिव्या' अ' न्तरो,
य' ं पृथिवी' न' वे' द,
य' स्य पृथिवी' श' रीरं,
य' ः पृथिवी' म' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM8/k4
यो' ऽप्सु' ति' ष्ठन्नद्भ्यो' ऽन्तरो,
य' मा' पो न' विदु' ः
य' स्या' पः श' रीरं,
यो' ऽपो' ऽन्तरो यम' यति
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM9/k5
यो' ऽग्नौ' ति' ष्ठन्नग्ने' र' न्तरो,
य' मग्नि' र्न' वे' द,
य' स्याग्नि' ः श' रीरं,
यो' ऽग्नि' म' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM10/k6
यो' ऽन्त' रिक्षे ति' ष्ठन्नन्त' रिक्षाद' न्तरो,
य' मन्त' रिक्षं न' वे' द,
य' स्यान्त' रिक्षँ श' रीरं,
यो' ऽन्त' रिक्षम' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM11/k7
यो' वायौ' ति' ष्ठन्वायो' र' न्तरो,
य' ं वायु' र्न' वे' द,
य' स्य वायु' ः श' रीरं,
यो' वायु' म' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pk8

add. K
यो दिवि तिष्ठन्दिवोऽन्तरो,
यं द्यौर्न वेद,
यस्य द्यौः शरीरं,
यो दिवमन्तरो यमयति
एष त आत्मान्तर्याम्यमृतः॥

pM12/k9
य' आदित्ये' ति' ष्ठन्नादित्या' द' न्तरो,
य' मादित्यो' न' वे' द,
य' स्यादित्य' ः श' रीरं,
य' आदित्य' म' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM13/k11
य' श्चन्द्रतारके' ति' ष्ठङ्चन्द्रतारका' द' न्तरो,
य' ं चन्द्रतारक' ं न' वे' द,
य' स्य चन्द्रतारक' ँ श' रीरं,
य' श्चन्द्रतारक' म' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pk12

add. K
य आकाशे तिष्ठन्नाकाशादन्तरो,
यमाकाशो न वेद,
यस्याकाशः शरीरं,
य आकाशमन्तरो यमयति
एष त आत्मान्तर्याम्यमृतः॥

pM14/k10
यो' दिक्षु' ति' ष्ठन्दिग्भ्यो' ऽन्तरो,
य' ं दि' शो न' विदु' ः
य' स्य दि' शः श' रीरं,
यो' दिशो' ऽन्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM15/k om॥
यो' विद्यु' ति ति' ष्ठन्विद्यु' तो' ऽन्तरो,
य' ं विद्यु' न्न' वे' द,
य' स्य विद्यु' च्छ' रीरं,
यो' विद्यु' तो' ऽन्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM16/k om॥
यो' स्तनयित्नौ' ति' ष्ठन्स्तनयित्नो' र' न्तरो,
य' ँ स्तनयित्नु' र्न' वे' द,
य' स्य स्तनयित्नु' ः श' रीरं,
यो' स्तनयित्नो' र' न्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM17/k om॥
यो' स' र्वेषु लोके' षु ति' ष्ठन्स' र्वेभ्यो लोके' भ्यो' ऽन्तरो,
य' ँ स' र्वे लोका' न' विदु' ः
य' स्य स' र्वे लोका' ः श' रीरं,
यो' स' र्वेभ्यो लोके' भ्यो' ऽन्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM18/k om॥
यो' स' र्वेषु वे' देषु ति' ष्ठन्स' र्वेभ्यो वे' देष्व' न्तरो,
य' ँ स' र्वे वे' दा न' विदु' ः
य' स्य स' र्वे वे' दाः श' रीरं,
यो' स' र्वेभ्यो वे' देभ्यो' ऽन्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM19/k om॥
यो' स' र्वेषु यज्ञे' षु ति' ष्ठन्स' र्वेभ्यो यज्ञे' भ्यो' ऽन्तरो,
य' ँ स' र्वे यज्ञा' न' विदु' ः
य' स्य स' र्वे यज्ञा' ः श' रीरं,
यो' स' र्वेभ्यो यज्ञे' भ्यो' ऽन्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM20/k15
य' ः स' र्वेषु भूते' षु ति' ष्ठन्त्स' र्वेभ्यो भूते' भ्यो' ऽन्तरो,
य' ँ स' र्वाणि भूता' नि न' विदु' ः
य' स्य स' र्वाणि भुता' नि श' रीरं,
य' ः स' र्वाणि भूता' न्य' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृत॥
इ' त्य् उ एवा' धिभूत' म्

K om. u eva
अ' थाध्यात्म' म्॥

pM21/k16
य' ः प्राणे' ति' ष्ठन्प्राणा' द' न्तरो,
य' ं प्राणो' न' वे' द,
य' स्य प्राण' ः श' रीरं,
य' ः प्राण' म' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM22/k17
यो' वाचि' ति' ष्ठन्वाचो' ऽन्तरो,
य' ं वा' ङ् न' वे' द,
य' स्य वा' क्ष' रीरं,
यो' वा' चम' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM23/k18
यश्च' क्षुषि ति' ष्ठङ्च' क्षुषो' ऽन्तरो,
य' ं च' क्षुर्न' वे' द,
य' स्य च' क्षुः श' रीरं,
य' श्च' क्षुर' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM24/k19
य' ः श्रो' त्रे ति' ष्ठङ्छ्रो' त्राद' न्तरो,
य' ँ श्रो' त्रं न' वे' द,
य' स्य श्रो' त्रँ श' रीरं,
य' ः श्रो' त्रम' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM25/k20
यो' म' नसि ति' ष्ठन्म' नसो' ऽन्तरो,
य' ं म' नो न' वे' द,
य' स्य म' नः श' रीरं,
यो' म' नो' ऽन्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM26/k21
य' स् त्व' चि ति' ष्ठँस् त्व' चो' ऽन्तरो,
य' ं त्व' ङ् न' वे' द,
य' स्य त्व' क्ष' रीरं,
य' स् त्व' चम' न्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pk22

add. K
यो विज्ञाने तिष्ठन्विज्ञानादन्तरो,
यं विज्ञानं न वेद,
यस्य विज्ञानँ शरीरं,
यो विज्ञानमन्तरो यमयति
एष त आत्मान्तर्याम्यमृतः॥

pM27/k14
य' स् ते' जसि ति' ष्ठँस् ते' जसो' ऽन्तरो,
य' ं ते' जो न' वे' द,
य' स्य ते' जः श' रीरं,
य' स् ते' जो' ऽन्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM28/k13
य' स् त' मसि ति' ष्ठँस् त' मसो' ऽन्तरो,
य' ं त' मो न' वे' द,
य' स्य त' मः श' रीरं,
य' स् त' मो' ऽन्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM29/k23
यो' रे' तसि ति' ष्ठँ रे' तसो' ऽन्तरो,
य' ं रे' तो न' वे' द,
य' स्य रे' तः श' रीरं,
यो' रे' तो' ऽन्तरो यम' यति,
स'

K eshha
त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM30/k om॥
य' आत्म' नि ति' ष्ठन्नात्म' नो' ऽन्तरो,
य' मात्मा' न' वे' द,
य' स्यात्मा' श' रीरं,
य' आत्मा' न्तरो यम' यति,
स' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतः॥

pM31/k23
अ' दृष्टो द्रष्टा' श्रुतः श्रोता' मतो मन्ता' विज्ञतो विज्ञाता'॥
ना' न्यो' ऽतोऽस्ति द्रष्टा' ,
ना' न्यो' ऽतोऽस्ति श्रोता' ,
ना' न्यो' ऽतोऽस्ति मन्ता' ,
ना' न्यो' ऽतोऽस्ति विज्ञातै' ष' त आत्मा' न्तर्याम्य' मृतो'॥
अतोऽन्य' दा' र्तं॥
त' तो होद्दा' लक आ' रुणिरु' परराम॥

ch8

pMk1
अ' थ ह वाचक्न' व्य् उवाचः
ब्रा' ह्मणा भगवन्तो,
ह' न्ताह' मिम' ं या' ज्ञवल्क्यं

K om.
द्वौ' प्रश्नौ' प्रक्ष्या' मि;
तौ' चे' न्मे विवक्ष्य' ति

K om. vi
न' वै'

K om.
जा' तु युष्मा' कमिम' ं क' श्चिद्ब्रह्मो' द्यं जेते' ति॥
तौ' चे' द्मे न' विवक्ष्य' ति,
मुर्धा' स्य वि' पतिष्यती' ति

K om. tau॥.
पृच्छ, गार्गी' ति॥

pMk2
सा' होवाचाह' ं वै' त्वा, याज्ञवल्क्य ! ,
य' था का' श्यो वा वै' देहो वोग्रपुत्र' ,
उज्ज्य' ं धनु' र' धिज्यं कृत्वा' ,
द्वौ' बा' णवन्तौ सपत्नातिव्याधि' नौ ह' स्ते कृत्वो' पोत्तिष्ठे' द्
एव' मेवा' ह' ं त्वा द्वा' भ्यां प्रश्ना' भ्यामुपो' दस्थां॥
तौ' मे ब्रूही' ति॥
पृच्छ, गार्गी' ति॥

pMk3
सा' होवाचः
य' दूर्ध्व' ं,
याज्ञवल्क्य,
दिवो' ,
य' दवा' क्पृथिव्या' ,
य' दन्तरा' द्या' वापृथिवी' इमे' ,
य' द्भूत' ं च भ' वच्च भविष्य' च्चे' त्य् आच' क्षते,
क' स्मिँस् त' दो' तं च प्रो' तं चे' ति॥

pMk4
स' होवाचः
य' दूर्ध्व' ं,
गार्गि,
दिवो' ,
य' दवा' क्पृथिव्या' ,
य' दन्तरा' द्या' वापृथिवी' इमे' ,
य' द्भूत' ं च भ' वच्च भविष्य' च्चे' त्य् आच' क्षत,
आकाशे' त' दो' तं च प्रो' तं चे' ति॥

pMk5
सा' होवचः
न' मस् ते

K add॥astu
याज्ञवल्क्य,
यो' म एत' ं व्य' वोचो'॥
अपरस्मै धार' यस्वे' ति॥
पृच्छ, गार्गी' ति॥

pMk6
सा' होवाचः
य' दूर्ध्व' ं,
याज्ञवल्क्य,
दिवो' ,
य' दवा' क्पृथिव्या' ,
य' दन्तरा' द्या' वापृथिवी' इमे' ,
य' द्भूत' ं च भ' वच्च भविष्य' च्चे' त्य् आच' क्षते,
क' स्मिँस् त' दो' तं च प्रो' तं चे' ति॥

pMk7
स' होवाचः
य' दूर्ध्व' ं,
गार्गि,
दिवो' ,
य' दवा' क्पृथिव्या' ,
य' दन्तरा' द्या' वापृथिवी' इमे' ,
य' द्भूत' ं च भ' वच्च भविष्य' च्चे' त्य् आच' क्षत,
आकाश' एव' त' दो' तं च प्रो' तं चे' ति॥
कस्मिन्नु' ख' ल्वाकाश' ओ' तश्च प्रो' तश्चे' ति॥

pMk8
स' होवाचैत' द्वै' त' दक्ष' रं,
गार्गि,
ब्राह्मणा' अभि' वदन्ति
अ' स्थूलम' नणु
अ' ह्रस्वम' दीर्घम्
अलो' हितमस्नेह' म्
अच्छाय' मतमो' ,
अवाय्व' नाकाश' म्
असङ्ग' म्
अस्पर्श' म्

K om.
अगन्ध' म्
अरस' म्

K arasam.h agandham
अचक्षु' ष्कम्
अश्रोत्र' म्
अवा' ग्
अमनो' ,
अतेज' स्कम्
अप्राण' म्
अ' मुखम्
अ' नामा' गोत्रम्
अज' रम्
अम' रम्
अभ' यम्
अमृतम्
अरजो' ,
अशब्द' म्
अ' विवृतम्
अ' संवृतम्
अपूर्व' म्
अनपर' म्
अनन्तर' म्

K pro anAma॥. anantaram.h

schribitamAtram.h anantaram
अबाह्य' ं;
न' त' दश्नोति

K ashnAti
क' ं चन'

kkiM chana
न' त' दश्नोति

K ashnAti
क' श्चन'॥

pMk9
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि,
द्या' वापृथिवी' वि' धृते तिष्ठत;
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि,
सूर्यचन्द्रम' सौ वि' धृतौ तिष्ठत;
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि

K add. nimeshhA muhUrtA
अहोरात्रा' णि~

kadd. ardhamAsA\`
मा' सास्~ ऋत' वस्~ संवत्सरा' स्~

kadd. i\`ti
वि' धृतास् तिष्ठन्ति~

K add. nimeshhA muhUrtA
अहोरात्रा' ण्य्

kadd. ardhamsA\`
मा' सा ऋत' वः संवत्सरा'

kadd. i\`ti
वि' धृतास् तिष्ठन्ति
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि,
प्रा' च्योऽन्या' न' द्यः स्यन्दन्ते श्वेते' भ्यः प' र्वतेभ्यः,
प्रती' च्योऽन्या' ,
या' ंयां च दि' शम्

K add. anv
एत' स्य वा' अक्ष' रस्य प्रशा' सने,
गार्गि,
द' दतं

K dadato
मनुष्या' ः प्र' शसन्ति,
य' जमानं देवा' ,
द' र्व्यं

K darvIM
पित' रोऽन्वा' यत्ताः॥

pMk10
यो' वा' एत' दक्ष' रम' विदित्वा,
गार्गि

K gArgi aviditvA
अस्मि' ँल् लोके' जुहो' ति,
द' दाति

K yajate
त' पस्यति~ अ' पि

K ta\`pas ta\`pyate
बहू' नि वर्षसहस्रा' णि~ अ' न्तवन्

kantavad
एव' ~ अस्य स' लोक' स्~

ktad

pro sa loko
भवति
यो' वा' एत' दक्ष' रम' विदित्वा,
गार्ग्य्

K gArgi aviditvA
अस्मा' ल् लोका' त्प्रै' ति,
स' कृपणो' ;
अथ य' एत' दक्ष' रं,
गार्गि,
विदित्वा' स्मा' ल् लोका' त्प्रै' ति,
स' ब्राह्मण' ः॥

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